सिरोही, राजस्थान ।
(तुषार पुरोहित) ,

सिरोही
कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के खिलाफ 36 कौम सर्व समाज लामबंद
28 जनवरी को सरगामाता मंदिर के पास महाआंदोलन,
सरगरा समाज ने किया पूर्ण समर्थन का ऐलान
सिरोही।
सिरोही जिले में प्रस्तावित कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के विरुद्ध जनआक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना को लेकर पर्यावरण, जल स्रोतों और स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों के विरोध में 36 कौम सर्व समाज एकजुट होकर मैदान में उतर आया है। सर्व समाज की यह अभूतपूर्व एकता अब आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनती नजर आ रही है।
सर्व समाज की एकजुटता बनी आंदोलन की शक्ति
खनन परियोजना के विरोध में जिलेभर में व्यापक जनसमर्थन देखने को मिल रहा है। अलग–अलग जाति, वर्ग और समुदायों के लोग एक मंच पर आकर परियोजना के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। समाजों का कहना है कि खनन से क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा, जल स्रोत प्रभावित होंगे और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर संकट खड़ा होगा। इसी को लेकर सर्व समाज ने आंदोलन को निर्णायक रूप देने का संकल्प लिया है।
सरगरा समाज ने किया खुला समर्थन
इस क्रम में सरगरा समाज के भीतरोट परगना ने भी कमलेश मेटाकास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में आगामी 28 जनवरी को शुरू हो रहे महाआंदोलन को हर रूप में पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। समाज की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरगामाता मंदिर के पास आयोजित होने वाले इस आंदोलन में समाज के लोग बड़ी संख्या में भाग लेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
हजारों की भीड़ उमड़ने की संभावना
आंदोलन को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार 28 जनवरी को होने वाले महाआंदोलन में हजारों की संख्या में लोगों के उमड़ने की संभावना है। ग्रामीण, किसान, युवा और महिलाएं सभी वर्ग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। गांव–गांव में बैठकों का दौर जारी है और आंदोलन की तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं।
सामाजिक संगठनों का खुला समर्थन
कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के विरोध में कई सामाजिक संगठनों ने भी खुलकर समर्थन दिया है। संगठनों का कहना है कि विकास के नाम पर प्रकृति और जनहित से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने जनभावनाओं की अनदेखी की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
क्षेत्र में गजब की एकता
इस पूरे घटनाक्रम में क्षेत्रवासियों की गजब की एकता देखने को मिल रही है। सर्व समाज का स्पष्ट संदेश है कि यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की है। 28 जनवरी का महाआंदोलन अब सिरोही जिले के लिए एक निर्णायक दिन साबित हो सकता