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सिरोही, राजस्थान ।

(तुषार पुरोहित ),

कमलेश मेटाकास्ट खनन के विरोध में राजपुरोहित समाज का बड़ा ऐलान

28 जनवरी को प्रस्तावित आंदोलन को पूर्ण समर्थन, 36 कौम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का संकल्प

रोई भीतरोट के तीनो परगनो का समर्थन का ऐलान समाज के अध्यक्षो ने की घोषणा

सिरोही।
सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना के विरोध को लेकर अब सामाजिक समर्थन और तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में राजपुरोहित समाज ने एक बड़ा और निर्णायक फैसला लेते हुए आगामी 28 जनवरी 2026 को प्रस्तावित आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। राजपुरोहित समाज ने रोई भीतरोट परगना ने यह ऐलान किया है।
भारजा गांव में हुई सामाजिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय भारजा गांव में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में समाज के वरिष्ठजनों, प्रबुद्ध नागरिकों और युवा प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि राजपुरोहित समाज खनन परियोजना के विरोध में पूरी मजबूती से आंदोलन के साथ खड़ा रहेगा।

चार ग्राम पंचायतों के 12 गांवों का मिलेगा सहयोग

बैठक में निर्णय लिया गया कि राजपुरोहित समाज खनन परियोजना को निरस्त करवाने की मांग को लेकर चार ग्राम पंचायतों के 12 गांवों से हर संभव सहयोग, मदद और समर्थन देगा। समाज ने स्पष्ट किया कि यह सहयोग केवल सांकेतिक नहीं होगा, बल्कि आंदोलन के हर चरण में सक्रिय भागीदारी निभाई जाएगी।

36 कौम के साथ एकजुटता का संकल्प

राजपुरोहित समाज ने यह भी ऐलान किया कि वह इस संघर्ष में 36 कौम के सर्व समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। समाज के वक्ताओं ने कहा कि यह केवल किसी एक समाज या क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि जनहित, पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा सवाल है।
‘36 कौम की पीड़ा हमारी पीड़ा’ — समाज का संदेश
बैठक में समाज की ओर से भावनात्मक लेकिन स्पष्ट संदेश दिया गया कि
“36 कौम की पीड़ा हमारी पीड़ा है। किसी भी समाज के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। गलत के खिलाफ और सत्य के समर्थन में हम पूरी ताकत से साथ देंगे।”

समाज ने दो टूक कहा कि खनन परियोजना से क्षेत्र की कृषि, जलस्रोत, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आंदोलन को मिलेगा सामाजिक बल

राजपुरोहित समाज के इस फैसले से खनन विरोधी आंदोलन को नया सामाजिक बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभिन्न समाजों के एकजुट होने से आंदोलन और अधिक प्रभावी होगा तथा प्रशासन और सरकार तक जनता की आवाज मजबूती से पहुंचेगी।

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