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सिरोही, राजस्थान ।

अवैध खनन उजागर करने पर पत्रकार तुषार पुरोहित की जान कों खतरा, पुलिस अधीक्षक से मांगी सुरक्षा, उचित कार्रवाई की मांग, लिखा पत्र

पिण्डवाड़ा क्षेत्र में खनन माफियाओ से जुड़ा मामला, परिवार सहित सुरक्षा की मांग

सिरोही।
जिले के पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में अवैध खनन को उजागर करना पत्रकार को भारी पड़ता नजर आ रहा है। ग्राम वाटेरा निवासी वरिष्ठ पत्रकार तुषार पुरोहित ने अवैध बजरी, पत्थर व मिट्टी खनन से जुड़े मामलों को लगातार सामने लाने के बाद अपनी जान-माल को खतरा बताते हुए पुलिस अधीक्षक सिरोही को लिखित में पत्र लिखकर स्वयं एवं अपने परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने खनन माफिया द्वारा षड्यंत्र रचने, जानलेवा हमला करने और परिवार को डराने-धमकाने की आशंका जताई है।

खनन माफियाओ के विरुद्ध खबर प्रसारित करने के कारण बढ़ा खतरा

पत्रकार तुषार पुरोहित ने अपने प्रार्थना-पत्र में बताया कि वह लंबे समय से जनहित से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष व तथ्यपरक पत्रकारिता कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने पिण्डवाड़ा क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के मामलों को उजागर किया, जिससे प्रशासन हरकत में आया और संबंधित विभागों द्वारा जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच शुरू होते ही अवैध खनन में लिप्त माफिया तत्वों में असंतोष और आक्रोश बढ़ गया, जिसका सीधा असर उनकी सुरक्षा पर पड़ रहा है।

खनन परियोजना पर भी उठाई आवाज

पत्रकार द्वारा क्षेत्र में प्रस्तावित मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर भी तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की गई। इस परियोजना को लेकर पर्यावरण, स्थानीय जनजीवन और संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों को समाचारों के माध्यम से सामने रखा गया। बताया जा रहा है कि इन खबरों के बाद खनन से जुड़े प्रभावशाली लोगों की गतिविधियां बढ़ी हैं और पत्रकार पर दबाव बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विश्वसनीय सूत्रों से मिली धमकी की आशंका

प्रार्थना-पत्र में उल्लेख किया गया है कि विश्वसनीय माध्यमों से यह सूचना मिल रही है कि अवैध खनन से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग पत्रकार के विरुद्ध साजिश रच सकते हैं। इनमें प्राणघातक हमला, जान-माल की क्षति या परिवार को भयभीत करने जैसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं, ताकि सच्चाई को दबाया जा सके। इस आशंका के चलते पत्रकार और उनका परिवार मानसिक तनाव में है।

संवैधानिक दायित्व निभाने की कीमत?

पत्रकार तुषार पुरोहित ने स्पष्ट किया कि अवैध गतिविधियों को उजागर करना पत्रकार का संवैधानिक और नैतिक दायित्व है। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका प्रहरी की होती है, लेकिन वर्तमान हालात में इस दायित्व के निर्वहन के कारण उन्हें और उनके परिवार को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा नहीं मिली तो किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस से तीन प्रमुख मांगें

पुलिस अधीक्षक को दिए लिखें पत्र में पत्रकार ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
पहली, उन्हें और उनके परिवार को तत्काल व आवश्यक पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
दूसरी, उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की धमकी, साजिश या आपराधिक गतिविधि को गंभीरता से लेते हुए पूर्व-रोकथामात्मक कार्रवाई की जाए।
तीसरी, उन्हें विधि के अंतर्गत संरक्षण दिया जाए, ताकि वह बिना भय और दबाव के अपनी पत्रकारिता जारी रख सकें।

प्रशासन और मीडिया में हलचल

मामले की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, आईजी जोधपुर रेंज, जिला कलेक्टर, डीएसपी पिण्डवाड़ा सहित संबंधित अधिकारियों और समस्त प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी भेजी गई है। इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत में भी चिंता का माहौल है। कई पत्रकारों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की दरकार

जानकारों का कहना है कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना और कठिन हो जाएगा। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह न केवल निष्पक्ष जांच कराए, बल्कि सच सामने लाने वालों को पूरा संरक्षण भी दे, ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका मजबूत बनी रहे।

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