सिरोही, राजस्थान ।

जावाल अवैध निर्माण मामला: सचिव ने कैमरे पर माना – ‘न पट्टा जारी हुआ, न NOC’, फिर भी जारी है निर्माण, पत्रकार से की गई अभद्रता

सुनील सिंघानिया| जावाल (सिरोही) | जावाल ग्राम पंचायत क्षेत्र की खालसा भूमि पर चल रहे अवैध निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। स्थानीय निवासी गोविंद राजगुरु द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद जब पत्रकार सुनील सिंघानिया ने इस पूरे मामले की पड़ताल की, तो ग्राम पंचायत सचिव प्रशांत कुमार ने कैमरे पर खुद स्वीकार किया कि विवादित भूमि पर हो रहे निर्माण के लिए न तो कोई पट्टा जारी हुआ है और न ही कोई NOC दी गई है।

जब पत्रकार ने पंचायत कार्यालय में सचिव से सवाल किया कि बिना कानूनी दस्तावेज़ों के यह निर्माण कैसे जारी है, तो सचिव ने जवाब दिया कि उन्होंने काम रोकने के लिए नोटिस जारी किया है और कार्रवाई जारी है। लेकिन जब पत्रकार ने मौके से बताया कि निर्माण कार्य अभी भी चालू है, तो सचिव कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके और बोले कि “कानूनी प्रक्रिया चल रही है, हम किसी का हाथ नहीं पकड़ सकते।”

पैसे और दबाव के सवाल पर सचिव का पलटवार
पत्रकार ने जब यह पूछा कि क्या इस पूरे मामले में कोई दबाव है या पैसे का लेन-देन हुआ है, तो सचिव प्रशांत कुमार ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा, “अगर पैसा खिलाया होता, तो मैं नोटिस नहीं देता।”

खालसा भूमि पर विवाद – पत्रकार से अभद्रता
मामले की गहराई जानने के लिए जब पत्रकार सुनील सिंघानिया मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्यकर्ताओं से दस्तावेज़ दिखाने को कहा, तो वहां मौजूद लोगों ने जवाब दिया कि “कानाराम जी ऊपर बैठे हैं, बुला रहे हैं।” थोड़ी देर के लिए पत्रकार बाहर निकले, इसी बीच उसी घर से एक व्यक्ति बाहर आया, फोन पकड़ाया और कहा “बात करो।” जैसे ही पत्रकार ने फोन हाथ में लिया, फोन पर खुद को दिनेश बताने वाले व्यक्ति ने ऊंची आवाज़ में कहा – “तुम कौन हो? यहां क्यों आए हो?” और भड़काऊ भाषा में धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया। बताया जा रहा है कि फोन कानाराम द्वारा ही करवाया गया, जो स्थानीय स्तर पर भू-माफिया के रूप में चर्चा में हैं।

बड़ा सवाल: आखिर संरक्षण किसका है?
ग्राम सचिव द्वारा स्पष्ट रूप से यह स्वीकार करने के बाद कि “पट्टा और NOC दोनों नहीं हैं,” अब सवाल उठता है कि बिना किसी कानूनी अनुमति के निर्माण जारी रहने के पीछे आखिर किसका संरक्षण है? पंचायत द्वारा नोटिस जारी करने के बावजूद निर्माण कार्य का न रुकना, पंचायत और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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