
जालोर/ राजस्थान ।
संस्कृत केवल भाषा ही नहीं,अपितु भारत की सांस्कृतिक चेतना की आत्मा है।
संस्कृत भारती जालोर विभाग द्वारा आयोजित चार दिवसीय आवासीय भाषा बोधनवर्ग के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता लीलाधर शर्मा प्रांत मंत्री ने अपने उद्बोधन में बताया कि संस्कृत केवल भाषा ही नहीं अपितु भारत की सांस्कृतिक चेतना की आत्मा है। हमारे शास्त्रों का ज्ञान विज्ञान सभी इसी भाषा निहित हैं तथा यह पूर्णतया वैज्ञानिक भाषा हैं ,जिसमें हमारे ऋषि मुनियों ने जीवन के प्रत्येक पक्ष का सुक्ष्म विवेचन किया है। मुख्य अतिथि आहोर विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने संस्कृत को अनेक भाषाओं की जननी बताया ,उन्होंने कहा कि सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए आधुनिक विकास के साथ संस्कृत ज्ञान का समन्वय आवश्यक है,भैरवनाथ धाम के महाराज महेशनाथ ने सभी को आशीर्वचन प्रदान किए। जालोर जिलाध्यक्ष कल्पेश बोहरा ने वर्ग का परिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ग में कुल 16 स्थानों से 80 शिक्षार्थी, शिक्षक व प्रबंधकों ने भाग लिया ।
शिक्षार्थी कानसिंह, प्रियंका,भवानी सिंह ने अपने अनुभव कथन व संस्कृत में वार्तालाप का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि जवानमल सुथार ने भी संबोधित किया।अंत में तुलसीदास शर्मा प्रांत अध्यक्ष द्वारा अतिथियों, भामाशाओ का आभार प्रकट किया,मंच संचालन विभाग सह संयोजक च्यवन ठाकुर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में अजय गुप्ता, श्रवण विश्नोई,मूलाराम, भंवर लाल मूंगिया, नोपाराम सुथार,यशवन्त भट्ट,विक्रम प्रजापत, शांतिलाल घांची,नारायण सिंह राजपुरोहीत,दिलीप सोनी सहित अनेक कार्यकर्ता व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रिपोर्ट चौथमल सूर्याल ।

