
जावाल/सिरोही,राजस्थान ।
सिरोही ज़िला के मंडवाड़िया ग्राम पंचायत के गांव देलदर में गत 15 अगस्त को समुंदर हिलोरने , तालाब पूजन की परम्परा हर्षोल्लास से संपन्न हुई । इस अवसर पर गांव में लोगो का हुजूम जनसैलाब उमड़ा पड़ा । गांव में हरेक गली मोहल्लों के लोगों में जश्न उत्साह उमंग का माहौल देखने को मिला ।ग्रामीणों ने बताया कि तालाब पूजन का यह उत्सव ,शुभ अवसर लगभग 35 वर्षों के बाद गांव में वापस आया है, गांव के बुज़र्ग लोग बताते है कि तालाब पूजन कि परम्परा पांडव काल में शुरू हुई थी । पांडव काल में किसी गांव में बहन का कोई सगा भाई नहीं था,तो उसकी देवराणी जेठानि उसको तानें मारती थीं ।जब उस बहन की सन्तान का विवाह होने वाला था और उसका सगा भाई नहीं था तो वह मन में बहुत दुखी हुई । वो बहन गांव के तालाब पर मटका लेकर पानी भरने गई थी और सगाभाई नहीं होने से तालाब की पाल पर बैठ कर वो बहुत रोने लगी । उस वक्त तालाब के पास से पाण्डव गुजर रहे थे । पांडवों ने बहन को रोने का कारण पूछा तो उसने बताया कि मेरे संतान का विवाह है और मेरा कोई भी सगाभाई भाई नहीं है, तो पांडवो ने कहा कि तुम मेरे हाथ की कलाई पर धर्म डोरा बांध दो, मैं आज से तुम्हारा भाई बन जाऊँगा और भाई के सभी फ़र्ज़ निभाऊँगा ।बहन ने पांडवों के हाथ पर धर्म डोरा बांधकर पांडवों को भाई बनाया और पांडवों ने चुनरी ओढ़ाकर उसको सगी बहन माना ।और वो बहुत ख़ुश हुई । माना जाता है कि तभी से यह समुंदर हिलोरने तालाब पूजन की परंपरा की शुरुआत हुई थी । यह बुज़र्ग लोगो का कहना है ।
देलदर गांव में तालाब पूजन पर हजारों की तादाद मे प्रवासी भी दूर दराज से गांव पहुंचे और तालाब पूजन किया । तालाब पूजन कि शुरुआत शुभ मुहूर्त में गांव के ठाकुर साहब परिवार द्वारा की गई उसके बाद में गांव के सभी जाति समाज के लोगो ने तालाब पूजन किया ।
“इस अवसर पर हजारों की तादाद मे लोग मौजूद रहे , जनसैलाब उमड़ा”
ऐसा लग रहा था जैसे गांव में मेले का आयोजन हो रहा है, हर गली चोरायो पर लोगों की भीड़ थी । तालाब पूजन को लेकर लोगों में खूब उत्साह देखने को मिला । भाईयों ने बहन को चुनरी ओढ़ाकर तालाब पूजन रस्म को निभाया , बहने भी तालाब पूजन करके बहुत खुश नजर आई । ग्रामीण बताते है कि ऐसा अवसर जीवन में मिलता है तो कभी भी चूकना नहीं चाहिए । यह जीवन में भाग्यशाली बहनों को ही मिलता है ।

