पिण्डवाड़ा, राजस्थान ।

ग्रामीण प्रतिभाओं को संवारने की पहल
पेशुआ गांव में ‘

माधव नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस’ बना शिक्षा की नई उम्मीद

पिण्डवाडा -ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं होती, आवश्यकता होती है तो केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की। इसी सोच को साकार करते हुए वर्ष 2018 में पेशुआ गांव में शुरू हुई ‘माधव नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस’ आज क्षेत्र के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए आशा की किरण बन चुकी है।

इस कोचिंग संस्थान की नींव उस संकल्प से पड़ी, जब संस्थापक माधुराम बामणिया स्वयं दसवीं कक्षा के छात्र थे। उस समय उनके गुरु कृष्ण पाल गढ़वी सर ने उन्हें अपने गांव में नि:शुल्क पढ़ाया। उसी अनुभव ने उनके मन में यह विचार जन्म दिया कि भविष्य में सफल होने पर वे भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराएंगे। समय के साथ यह विचार एक संकल्प बना और संकल्प ने ‘माधव नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस’ का रूप ले लिया।

वर्ष 2018 से निरंतर संचालित यह कोचिंग क्लास न केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान कर रही है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी जगा रही है।

दीपावली पर खेल प्रतियोगिता का आयोजन
वर्ष 2025 में दीपावली के पावन अवसर पर ‘माधव नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस, पेशुआ’ के तत्वावधान में एक दिवसीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में गांव के भामाशाहों एवं गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर सहयोग प्रदान किया। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं ने भाग लिया, जिससे खेल भावना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा मिला।

शिक्षा के साथ सर्वांगीण विकास पर जोर
कोचिंग के आयोजक माधुराम बामणिया का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के उन बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना है, जो संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ खेल और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया जाता है।

गौरतलब है कि माधुराम बामणिया वर्तमान में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, खारा वाटेरा में अध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और समाज सेवा के इस कार्य को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

‘माधव नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस’ आज यह साबित कर रही है कि यदि सोच सकारात्मक हो और उद्देश्य समाजहित का हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव संभव हैं।

Share.
Leave A Reply