सिरोही, राजस्थान ।

पिण्डवाड़ा पंचायत समिति में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित

बैठक में गूंजे “खनन परियोजना निरस्त करो” के नारे

सिरोही।
पंचायत समिति पिण्डवाड़ा की साधारण बैठक सोमवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर भवन पिण्डवाड़ा में प्रधान नितिन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, जयपुर की प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर माहौल गर्मा गया।
प्रधान ने सदन में मेटा कास्ट की खनन लीज निरस्त करने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया। प्रस्ताव पारित होते ही सदन में “खनन परियोजना निरस्त करो, निरस्त करो” के नारे गूंज उठे।

देरी से शुरू हुई बैठक

बैठक तय समय से करीब कुछ देर से देरी से शुरू हुई, क्योंकि उपखण्ड अधिकारी निर्धारित समय पर नहीं पहुंचे। जनप्रतिनिधि और अधिकारी सभागार में प्रतीक्षा करते रहे।
बैठक की शुरुआत में विकास अधिकारी नवलाराम चौधरी ने पिछली बैठक की कार्यवाही पढ़ी।

प्रधान बोले— संवाद नहीं, प्रशासक भय में जी रहे

प्रधान ने कहा कि भारजा, भीमाना, वाटेरा और रोहिड़ा क्षेत्र में मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट परियोजना के विरोध में जनता एक माह से आंदोलनरत है, लेकिन प्रशासन ने अब तक संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा— “प्रशासन को जनता से संवाद कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं हुआ। सदन की भावना है कि यह परियोजना निरस्त की जाए।”

अधिकारियों और सदस्यों में हुई तीखी बहस

प्रशासक भीमाना हेमेन्द्र सिंह देवड़ा, पवन कुमार राठौड़ और सविता रावल ने आंदोलन की स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार बताया। इस पर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. राजेश गोयल ने बताया कि जनसुनवाई प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक पंचायत से 15–20 सदस्यों कि कमेटी गठित की जाए जो प्रशासन के साथ वार्ता कर समाधान का रास्ता निकाले।

खनन विभाग पर निष्क्रियता के आरोप

प्रधान बंसल ने खनन विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से ब्लॉक में चुनाई पत्थर के सर्वे के लिए पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को पत्थर महंगे दामों पर खरीदने पड़ रहे हैं और चोरी-छिपे लाने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।
साथ ही, उन्होंने बजरी और पत्थर की लीज जल्द शुरू करने का प्रस्ताव भी पारित कराया।

विधायक समाराम गरासिया की चेतावनी

विधायक समाराम गरासिया ने बैठक में कहा कि अगर प्रस्तावित कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र को निरस्त नहीं किया गया, तो आदिवासी परिवार सड़कों पर उतर आएंगे, जिससे प्रशासन के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगी।

कॉलेज संघर्ष समिति ने रखी मांग

पिण्डवाड़ा कॉलेज संघर्ष समिति के सदस्यों ने बैठक में पहुंचकर प्रधान बंसल से झाड़ोली में बन रहे महाविद्यालय को निरस्त कर जनापुर सीमा (पिण्डवाड़ा मुख्यालय) में कॉलेज निर्माण का प्रस्ताव पारित करने की मांग की।

कई विभागों पर हुई समीक्षा

बैठक में राजस्व, जलदाय, विद्युत, सार्वजनिक निर्माण, कृषि, रसद सहित कई विभागों की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई।
बैठक में तहसीलदार शंकरलाल पटेल, डीएसपी किशोरसिंह, डिप्टी भंवरलाल चौधरी, थानाधिकारी गंगाप्रसाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

मेटा कास्ट परियोजना की पृष्ठभूमि

मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्रा. लि. ने वर्ष 2011 में खनन परियोजना के लिए आवेदन किया था। सरकार ने 30 नवम्बर 2016 को कंपनी सहित अन्य आवेदनों को निरस्त कर दिया था। कंपनी ने इस निर्णय के खिलाफ 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
इसके बाद न्यायालय के आदेश पर सरकार ने 15 अगस्त 2020 को अनुज्ञा पत्र निरस्त करते हुए अपील की।
फिर 25 जून 2021 को अदालत ने कंपनी के पक्ष में निर्णय दिया, और सरकार ने 3 जनवरी 2021 को अपील नहीं करने की सिफारिश की।
30 जून 2022 को परियोजना प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृति मिली।
19 मार्च 2023 को कंपनी ने पर्यावरण मंत्रालय को पत्र भेजा। 15 जुलाई 2025 को जयपुर में आयोजित राजस्थान निवेश शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में ₹1700 करोड़ का एमओयू साइन हुआ।

खनन विभाग के अनुसार, चारागाह और राजस्व भूमि की एनओसी मिलने के बाद ही अधिग्रहण होगा, तथा खातेदारी भूमि बिना खातेदारों की स्वीकृति के अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
फिलहाल विभाग ने कोई पट्टा जारी नहीं किया है।

जनता के सुलगते सवाल

अब जनता के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं—
क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति को रोकने के निर्देश देंगे?
क्या “राइजिंग राजस्थान” के तहत हुए एमओयू को रद्द किया जाएगा?
क्या सरकार जनता की भावना का सम्मान करते हुए परियोजना को पूर्ण रूप से निरस्त करेगी?
क्षेत्र की जनता का कहना है कि चाहे भूमि सरकारी हो या निजी, वे किसी भी हाल में इस परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे।
पिण्डवाड़ा की इस बैठक में पारित प्रस्ताव ने मेटा कास्ट खनन परियोजना को लेकर चल रहे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें इस पर हैं कि क्या राज्य सरकार और मुख्यमंत्री स्वयं इस विवादित परियोजना को निरस्त करने की पहल करेंगे या नहीं।

रोहिड़ा प्रशासक पर आरोप, जांच की मांग

कुछ ग्रामीणों ने रोहिड़ा ग्राम पंचायत के प्रशासक पवन राठौड़ पर रिश्तेदारों के नाम पर अवैध कब्जा और खनन के आरोप लगाए हैं।
शिकायत में सरकारी धन का दुरुपयोग कर सड़क निर्माण और पीपेला गांव में अतिक्रमण के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि राठौड़ ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। ग्रामीणों ने जांच की मांग की है ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके।

रिपोर्ट तुषार पुरोहित


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