सिरोही, राजस्थान ।

रोहिड़ा के सोमनाथ मंदिर में तीन दिन में क्षेत्रीय ग्रामीणों की दूसरी बड़ी बैठक सम्पन्न

खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का एक स्वर — “जल, जमीन और जंगल किसी भी कीमत पर नहीं जाने देंगे”

रोहिड़ा, वाटेरा, भीमाना और भारजा गांवों के सैकड़ों ग्रामीण रहे मौजूद

ग्रामीणों ने नेताओं पर गुमराह करने के आरोप लगाए — कहा, “अब जनता जाग चुकी है”

परियोजना से प्रदूषण और पर्यावरण संकट की आशंका पर जताई गहरी चिंता

रोहिड़ा ने क्षेत्र हित में हर सम्भव सहयोग का दिया पूर्ण भरोसा

सिरोही।
पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के विरोध की लहर लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को रोहिड़ा ग्राम पंचायत के सोमनाथ महादेव मंदिर प्रांगण में क्षेत्र के ग्रामीणों की तीन दिन के भीतर दूसरी बड़ी बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में रोहिड़ा, वाटेरा, भीमाना, भारजा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में खनन परियोजना का विरोध करते हुए इसे क्षेत्रहित में घातक बताया और सरकार से तुरंत इस परियोजना को निरस्त करने की मांग की।

❖ “जल, जमीन और जंगल किसी भी हालत में नहीं जाने देंगे”

बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि यह खनन परियोजना केवल जमीन छीनने का काम नहीं करेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, जलस्रोतों और मानव जीवन के लिए खतरा बन जाएगी। ग्रामीणों ने कहा कि “हम किसी भी कीमत पर अपनी मातृभूमि, जल-जंगल और जमीन को नष्ट नहीं होने देंगे।”
रोहिड़ा गांव के ग्रामीणों ने इस संघर्ष में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यदि समय आया तो गांव का हर व्यक्ति आंदोलन के लिए तैयार रहेगा।

❖ “गुमराह करने वालों से सावधान रहें”

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कुछ नेता ग्रामीणों को खनन परियोजना के पक्ष में गुमराह कर रहे हैं। ग्रामीणों ने ऐसे लोगों के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अब गांव की जनता जाग चुकी है और किसी के झांसे में नहीं आएगी। उन्होंने क्षेत्रवासियों से एकजुट होकर संघर्ष में शामिल होने की अपील की।

❖ प्रदूषण से पूरे क्षेत्र पर संकट

बैठक में बताया गया कि यदि यह खनन परियोजना शुरू होती है, तो रोहिड़ा सहित आसपास का पूरा क्षेत्र प्रदूषण से प्रभावित होगा, जिससे खेती-बाड़ी, पेयजल और मानवीय स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि जीवन के अस्तित्व का प्रश्न है।

❖ क्षेत्रीय एकता बनी मजबूती का प्रतीक

बैठक में यह बात साफ तौर पर उभरकर आई कि चारों ग्राम पंचायतों—रोहिड़ा, भीमाना, वाटेरा और भारजा—के ग्रामीण अब पूरी तरह एकजुट हैं और इस आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प ले चुके हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि “यह लड़ाई सिर्फ आज की नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है,” और सभी ने एक स्वर में खनन परियोजना के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की घोषणा की।

रिपोर्ट तुषार पुरोहित ।

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