सिरोही, राजस्थान ।

किसानों के लिए वरदान और राहगीरों के लिए समाधान — अरावली की पहाड़ियों से बहता पानी बना चर्चा का विषय

(सुरेश पुरोहित की रिपोर्ट)

सिरोही। पश्चिमी राजस्थान के सिरोही जिले सहित अरावली पर्वतमाला की गोद में बसे गांवों में इन दिनों बहता पानी वरदान भी साबित हो रहा है और परेशानी का कारण भी। लगातार बहाव के कारण सैकड़ों नदी-नालों और रपट पुलियों पर पानी की परत जम गई है, जिससे इन पुलियों पर फिसलन पैदा हो गई है। इस फिसलन से बाइक चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं, ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यही पानी यदि संरक्षित कर लिया जाए, तो यह क्षेत्र की कृषि व्यवस्था के लिए अमृत बन सकता है।

हाल ही में सिरोही जिले की कृष्णगंज व स्वरूपगंज नदी के बिच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें बाइक सवार बार-बार फिसलकर गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। यह दृश्य न केवल सिरोही बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। इसी तरह के कई और वीडियो सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं, जिनमें मोटरसाइकिल और स्कूटर सवार फिसलन भरी पुलियों पर गिरते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पुलियों पर “लील” यानी काई की मोटी परत जम चुकी है, जिससे राहगीरों का गुजरना बेहद जोखिमभरा हो गया है।

ग्रामीणों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि प्रशासन और लोक निर्माण विभाग द्वारा इन पुलियों की सफाई और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि लगातार दुर्घटनाओं के कारण कई लोग घायल हो चुके हैं, कुछ को तो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लोगों का कहना है कि “सरकार अगर इन रपट पुलियों की नियमित सफाई करवाए तो अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।”

दूसरी ओर, पर्यावरण और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह पानी जो अरावली की पहाड़ियों से रिसकर नीचे की नदियों और नालों में बह रहा है, उसे रोकने के लिए छोटे-छोटे बांध, एनिकट और जलाशय बनाए जाएं तो यह पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाकर खेती को संजीवनी दे सकता है। यह जल संचयन न केवल भूजल स्तर बढ़ाएगा बल्कि गर्मी के मौसम में भी सिंचाई के साधन उपलब्ध कराएगा।

कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि सिरोही, पिंडवाड़ा, आंबाजी, मंडार, रेवदर और आसपास के इलाकों में हर साल लाखों लीटर मीठा पानी बहकर बेकार चला जाता है। यदि इस पानी को सही दिशा में उपयोग किया जाए तो यह किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है और बारिश के बाद खेतों में सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान बन सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को दोहरी दृष्टि से कार्य करना चाहिए — पहली, राहगीरों की सुरक्षा के लिए पुलियों की नियमित सफाई करवाना और दूसरी, बहते पानी को सहेजने के लिए जल संरक्षण की ठोस योजना बनाना। क्योंकि यही पानी, जो आज दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, कल खेतों की हरियाली और ग्रामीण समृद्धि की नींव रख सकता है।

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