सिरोही, राजस्थान ।

सुनील सिंघानिया|जावाल सिरोही जिले के बरलूट थाना क्षेत्र और आसपास के गांवों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। मंदिरों, घरों और सार्वजनिक स्थलों पर एक के बाद एक चोरी होने के बावजूद पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने खुला आंदोलन शुरू किया। मनोरा, नून गांव, पाड़ीव, देलदर, नवारा, पांडव और अन्य गांवों के सैकड़ों लोग बरलूट थाने के सामने धरने पर बैठ गए। इस धरने में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही; करीब 1000 महिलाएं भी धरना स्थल पर पहुंचीं और “पुलिस प्रशासन हाय–हाय” तथा “पुलिस मुर्दाबाद” के नारे लगाए। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिरों की मूर्तियों के मुकुट–छत्र तक चोरी हो चुके हैं, महादेव जी की आंख तक निकाल ली गई है, लेकिन पुलिस अब तक एक भी बड़ा खुलासा नहीं कर पाई है।
धरना स्थल पर उपखंड अधिकारी हरि सिंह देवल और पुलिस उप अधीक्षक मुकेश चौधरी पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों से संवाद किया। SDM ने माना कि चोरी की घटनाओं में प्रशासन की कमी रही है और कहा कि जांच जारी है, लोगों को थोड़ा समय देना चाहिए। DSP ने बताया कि चोरी की घटनाओं की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है, एस्ट्रो गाड़ी तैनात की गई है और पांच–पांच ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर अब तक की कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी।
धरना बढ़ता देख पूर्व विधायक एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा खुद आगे आए और ग्रामीणों के साथ प्रतिनिधिमंडल बनाकर माउंट आबू गए। वहां राज्यपाल से मुलाकात हुई। राज्यपाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि सात दिन के भीतर चोरी की घटनाओं का खुलासा कर दिया जाएगा और इस संबंध में उन्होंने निवेदन भेजने की बात भी कही। इसी मुलाकात के दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान भी मौजूद थे। एसपी ने ग्रामीणों को स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप मुझे सात दिन का समय दें, चाहे कुछ भी हो जाए, मैं न केवल यह चोरी बल्कि पूर्व की सभी चोरियों का भी खुलासा कर दूँगा। यदि सात दिन में खुलासा न हुआ तो आप जो उचित समझें, करें।”
एसपी और राज्यपाल के इस आश्वासन ने धरना–अनशन कर रहे ग्रामीणों में भरोसा जगाया। बरलूट धरना स्थल पर लौटकर अनशन पर बैठे लोगों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि फिलहाल प्रशासन को सात दिन का समय दिया जाए। अनशन तोड़ने की औपचारिकता पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की मौजूदगी में पूरी हुई। लोढ़ा ने स्वयं ग्रामीणों को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया और कहा कि वे खुद इस मामले पर नजर रखेंगे तथा सात दिन में पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा करेंगे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिन में चोरियों का खुलासा नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने पुलिस गश्त बढ़ाने, बरलूट थाना अधिकारी को हटाने और मंदिरों की सुरक्षा के लिए विशेष बल लगाने जैसी मांगें भी रखीं। इस पूरे घटनाक्रम ने सिरोही जिले में कानून–व्यवस्था की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और अब सबकी नजरें एसपी की सात दिन की समय सीमा पर टिकी हैं।
