
सिरोही, राजस्थान ।
( V24 न्यूज़ चैनल रिपोर्टर) ।
सिरोही
पिण्डवाड़ा में प्रस्तावित खनन परियोजना का विरोध तेज, ग्रामीणों ने राष्ट्रपति के नाम विधायक प्रधान को सौंपा ज्ञापन
सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा तहसील में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को ग्रामीणों ने आबू-पिण्डवाड़ा विधायक समाराम गरासिया और पिण्डवाड़ा प्रधान नितिन बंसल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर परियोजना निरस्त करने की मांग की।
इस दौरान बाप पार्टी के पूर्व विधायक प्रत्याशी मेघराज गरासिया, शिवसेना जिला प्रमुख रमेश रावल और तुषार पुरोहित, शिव सेना उप जिला प्रमुख भरत राजपुरोहित भी उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने मांगा लिखित सहयोग
ज्ञापन सौंपते समय ग्रामीणों ने प्रधान नितिन बंसल से मांग की कि वे लिखित में यह स्पष्ट करें कि पंचायत समिति स्तर से खनन परियोजना का विरोध किया जाएगा और ग्रामीणों का साथ दिया जाएगा।
लेकिन बंसल ने ग्रामीणों को लिखित देने से साफ इंकार करते हुए कहा—
“हम सहयोग करेंगे, लेकिन लिखित में क्या देना है। जब माइंस आ जाएगी तब देखेंगे। अगर खनन माइंस हो गई है तो आप जयपुर जाकर सरकार से बात कीजिए, हम छोटे कर्मचारी हैं, इसमें क्या कर सकते हैं।”
बयान के बाद उठे तल्ख सवाल
प्रधान बंसल के इस बयान के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और कई गंभीर सवाल खड़े हो गए—
क्या प्रधान बंसल को माइंस स्वीकृति का इंतजार है?
जब तक स्वीकृति नहीं मिलेगी तब तक चुप्पी साधे रहेंगे और स्वीकृति के बाद सहयोग की बातें करेंगे?
स्वीकृति मिलने के बाद सहयोग का क्या अर्थ?
जब सरकार से सभी मंजूरियां मिल जाएंगी तब विरोध करना क्या महज़ औपचारिकता होगी? क्या तब तक देर नहीं हो जाएगी?
प्रधान पंचायत समिति स्तर पर क्यों नहीं दे रहे लिखित समर्थन?
जब उनकी पंचायत समिति के चार ग्राम पंचायतों के आदिवासी और अन्य ग्रामीण सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, तो प्रधान क्यों लिखित में रुख स्पष्ट करने से बच रहे हैं?
क्या प्रधान सरकार के दबाव में हैं या मौन सहमति दे चुके हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान के इस बयान से साफ लगता है कि वे खनन परियोजना के खिलाफ खुलकर खड़े होने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों में बढ़ा असंतोष
ग्रामीणों ने कहा कि खनन परियोजना से अरावली की पहाड़ियां, पर्यावरण, जलस्रोत और हजारों ग्रामीणों का जीवन प्रभावित होगा। ऐसे समय में प्रधान की चुप्पी और केवल मौखिक आश्वासन किसी भी रूप में पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर प्रधान बंसल सचमुच क्षेत्रहित में हैं तो उन्हें तत्काल लिखित में समर्थन देना चाहिए।
