सिरोही, राजस्थान ।

सुनील सिंघानिया | जावाल | मनोरा और सतापुरा गांव को जल जीवन मिशन का पानी नहीं मिलने से परेशान है, क्योंकि इन दोनों गांवों को जवाई बांध परियाेना से जोड़ा गया। इसका पानी नारदरा गांव से होते हुए मनोरा गांव में पहुुंचेगा। लेकिन कब पहुंचे इसका 2 सालों से हर घर नल योजना इंतजार हो रहा है। क्योंकि अब 1500 परिवारों को फ्लोराइड का पानी पीने को मजबूर है। क्योंकि नहीं तो नदी का पानी मिल रहा। मनोरा गांव के बस स्टैंड पर 20 साल पहले बनी टंकी से पानी पी रहे है। गांव के करीब 1 से डेढ किलोमीटर पैदल चल कर पानी भरने को आ रहे है। फ्लोराइड का पानी इनका है कि चाय बनाते ही चाय फट जाती है। सब्जी में दाल बनाते है तो दाल की सब्जी भी खराब हो जाती है। अब तो हालात ऐसे बने हुए है खाने बनाने के लिए पानी लेने वराड़ा या भूतगांव के खेतों से ला रहे है। अभी जो टंकी बनी हुई पूरी तरह से जर्जर है, यहां किसी भी घर में पानी नहीं मिलता है। सभी को बस स्टैंड पानी लेने जा पड़ता है। इसका समाधान के लिए सांसद लुभाराम चौधारी और राज्य मंत्री- क्षेत्र विधायक को कई बार ज्ञापन दिया। जवाब एक ही मिला एक साल इंतजार कराे… अब ग्रामीण बोले- हम दो साल से इंतजार कर रहे है।
ग्रामीण कमलेश सुथार ने बताया कि यहां परियोजना अभी तक पूरी नहीं हुई है, जिसके कारण ग्रामीणों को मजबूरन दूषित पानी का पीना पड़ रहा है।

जल जीवन मिशन: मनोरा और सतापुरा गांव के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर
जावाल क्षेत्र के मनोरा और सतापुरा गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी नहीं मिलने से लगभग 1500 परिवार फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। पिछले दो साल से इन गांवों के लोग ‘हर घर नल योजना’ के तहत पानी मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इन गांवों को जवाई बांध परियोजना से जोड़ा गया था, जिसका पानी नारदरा गांव से होते हुए मनोरा गांव तक पहुंचना था। हालांकि, यह परियोजना अभी तक पूरी नहीं हुई है, जिसके कारण ग्रामीणों को मजबूरन दूषित पानी का पीना पड़ रहा है। मनोरा गांव में 20 साल पुरानी एक जर्जर टंकी है, जहां से लोग लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर पानी भरते हैं। इस पानी में फ्लोराइड की मात्रा इतनी अधिक है कि चाय और दाल जैसी चीजें बनाने पर भी वे खराब हो जाती हैं।

1500 घरों को शुद्ध जल का इंतजार
जल जीवन मिशन (JJM) के तहत देशभर में हर घर को नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन झालावाड़ जिले के मनोरा और सतापुरा गांव के 1500 से ज्यादा परिवार आज भी दूषित और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीण पिछले तीन सालों से शुद्ध पेयजल की बाट जोह रहे हैं, जबकि उनके पड़ोसी गांवों- वराड़ा और भूतगांव- को जल जीवन मिशन का पानी मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के अधिकारी उनके गांवों की अनदेखी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वराड़ा गांव मनोरा से सिर्फ ढाई किलोमीटर और भूतगांव सतापुरा से तीन किलोमीटर दूर है। इन दोनों गांवों में JJM के तहत पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन मनोरा और सतापुरा के लोगों को यह सुविधा नहीं मिल पाई है।

अधिकारियों का दावा, दो फेज में मिलेगा पानी
इस मामले पर जब अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि दोनों गांवों को जल जीवन मिशन के तहत पानी उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि यह काम दो फेज में होगा। इस बयान से ग्रामीण और भी असमंजस में हैं क्योंकि वे सालों से इंतजार कर रहे हैं और अब भी कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई है।

फ्लोराइड युक्त पानी से सेहत पर खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। गांव के बच्चे और बुजुर्ग इस दूषित पानी के सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और जल्द से जल्द शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि 1500 घरों के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाया जा सके।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उनके पड़ोस के गांवों को पानी मिल सकता है तो उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और जल जीवन मिशन के तहत उनके गांवों में भी जल्द से जल्द पानी पहुंचाएं।
दोनों गांव को मिलाकर डीपीआर बनाकर भेजा है, सभी नेताओं से निवदेन किया है। सिर्फ वादे किया है, इस सरकार के वादे के हिसाब से पानी मिलने उम्मीद नहीं है, फ्लोराइड युक्त पानी पीने हम खुद पी रहे है। जनसुनवाई में अभी सबसे पहले यह ही बात होती है। पास मेंे भूतगांव और वराड़ा गांव में पानी मिल रहा है। नेता हमारे से भेदभाव कर रही है। जलदाय विभाग को ज्ञापन भी दिया है। प्रवीण कुमार पुरोहित, सरपंच मनोरा दोनों गांव को मिलाकर डीपीआर बनाकर भेजा है, सभी नेताओं से निवदेन किया है। सिर्फ वादे किया है, इस सरकार के वादे के हिसाब से पानी मिलने उम्मीद नहीं है, फ्लोराइड युक्त पानी पीने हम खुद पी रहे है। जनसुनवाई में अभी सबसे पहले यह ही बात होती है। पास मेंे भूतगांव और वराड़ा गांव में पानी मिल रहा है। नेता हमारे से भेदभाव कर रही है।
प्रवीण कुमार पुरोहित, सरपंच मनोरा

भेदभाव का आरोप: ग्रामीण अचल सिंह का कहना है कि पास के गांवों, जैसे वराड़ा और भूतगांव, को जल जीवन मिशन का पानी मिल रहा है, लेकिन उनके गांवों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। 20 साल पुरानी और जर्जर टंकी तक करीब एक से डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है।
अचल सिंह, ग्रामीण मनोरा

-1500 से ज़्यादा परिवार पिछले दो साल से शुद्ध पानी की एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। उन्हें मजबूरन ऐसा पानी पीना पड़ रहा है जिसमें इतना फ्लोराइड है कि उससे चाय और सब्ज़ियाँ तक खराब हो जाती हैं।
नाथू सिंह, मनोरा ग्रामीण

दूषित पानी को लेकर मेरे पास अभी तो कोई आया नहीं लेकिन ऐसा मामला है तो हम जलदाय विभाग की तरह से दूषित पानी है तो हम व्यवस्था करते हैं।

  • ओटाराम देवासी, सिरोही -शिवगंज विधायक और राज्य मंत्री, पंचायती राज, ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन

सिरोही जिले में पानी की समस्या

  • सिरोही जिले के दो गांवों में पानी की कमी है, जिससे दो साल पहले भेजी गई योजना पर कोई प्रगति नहीं हुई।
  • पानी की कमी के कारण सरकार ने योजना को रद्द कर दिया, और जब तक पानी का आरक्षण नहीं होगा, तब तक कोई उम्मीद नहीं है।
  • जवाई बांध में पानी के आरक्षण पर निर्भर करता है, और वर्तमान में कोई नई योजना शुरू होने की संभावना नहीं है।

पानी की व्यवस्था के लिए पीएचडी विभाग के कार्य

  • पीएचडी विभाग में दो शाखाएँ हैं: प्रोजेक्ट और रेगुलर पीएचडी। प्रोजेक्ट विभाग बांध के पानी की व्यवस्था देखता है, जबकि रेगुलर पीएचडी हैंडपंप, ट्यूबवेल, सोलर पंप या टैंकरों से पानी की व्यवस्था करता है।
  • बांध में पानी उपलब्ध होने पर योजना स्वीकृत हो जाती है और क्रियान्वित होती है, अन्यथा रेगुलर पीएचडी पानी पिलाने की व्यवस्था करता है।
  • पानी का आरक्षण होने पर ही प्रोजेक्ट विभाग कार्रवाई कर सकता है, अन्यथा रेगुलर पीएचडी को पानी की व्यवस्था करनी होती है।
    गजानंद प्रजापत PEHD ExEn Siorhi प्रोजेक्ट
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