V24 NEWS CHANNEL (माउंट आबू/सिरोही, राजस्थान) ;

(किशनलाल) ,

राजयोगी बीके निर्वैर के अंतिम दर्शनार्थ उमड़ा जनसैलाब

माउंट आबू, 21 सितम्बर।

पर्यटन स्थल माउंट आबू में शनिवार को ब्रह्माकुमारी संगठन के महासचिव दिवंगत बीके निर्वैर की बैकुंठी यात्रा में अंतिम दर्शनार्थ उमड़ा जनसैलाव। उन्होंने अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में गुरुवार रात को अंतिम सांस ली थी। शुक्रवार को उनकी पार्थिव देह आबूरोड शांतिवन परिसर में लाया गया। शनिवार को संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका बीके शशिप्रभा, राजयोगिनी बीके शीलू बहन, संगठन के उप महासचिव बीके बृजमोहन आनंद, मल्टीमीडिया चीफ बीके करुणा, शिक्षा प्रभाग अध्यक्ष बीके मृत्युंजय आदि के नेतृत्व में दिवंगत बीके निर्वैर की पार्थिव देह संस्थान के मुख्यालय पाण्डव भवन स्थित हिस्ट्री हॉल में दर्शनार्थ रखी गई। जिनके अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता उमड़ आया। उनका भौतिक शरीर पांडव भवन स्थित संगठन के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के समाधि स्थल शान्ति स्तंभ, राजयोग मेडिटेशन कक्ष, तपस्या स्थली बाबा की कुटिया, ओम शान्ति भवन आदि में भी ले जाया गया। जिसके बाद उनकी रथयात्रा (वैकुंठी) आध्यात्मिक संग्रहालय पहुंची। जहां से शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए आबूरोड के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर विभिन्न समाजसेवी संगठनों, राजनीतिक दलों, मीडियाकर्मी, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, केन्द्रीय व राज्य सरकार के अधिकारियों, समेत बड़ी संख्या में लोगों की ओर से मार्ग से गुजरती बैकुंठी पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इससे पूर्व दिवंगत बीके निर्वैर की पार्थिव देह ब्रह्माकुमारी संगठन के ज्ञान सरोवर परिसर में ले जाई गई। जहां ज्ञान सरोवर निदेशिका बीके प्रभा दीदी के नेतृत्व में पुष्पांजलि अर्पित की गई। ग्लोबल अस्पताल में अस्पताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा के नेतृत्व में अस्पताल के चिकित्सकों समेत समूचे स्टॉफ ने दिवंगत बीके निर्वैर को श्रद्धांजलि अर्पित की। जहां बड़ी संख्या में संस्थान के प्रतिनिधियों व श्रद्धालुओं ने उन्हें फूलहार कर श्रद्धांजलि अर्पित की। परपीड़ा को समझते थे वे अपनी पीड़ाकरीब चार दशक पूर्व चलते हुए किसी बुजुर्ग व्यक्ति के हाथ से चश्मा गिर गया था। जिसे उठाने के लिए बीके निर्वैर झुके तो उन्हें सीने में हल्का सा दर्द महसूस हुआ। जिसकी चिकित्सकीय जांच के लिए माउंट आबू में कोई व्यवस्था नहीं होने पर वे मुंबई गए। वहां चिकित्सकों ने उन्हें हॅार्ट की तकलीफ बताकर बाईपास सर्जरी कराने की सलाह दी। सर्जरी के बाद स्वस्थ होने पर उन्हें यह चिंता सताने लगी कि इसी तरह की व्याधि से माउंट आबू के नागरिक व यहां आने वाले पर्यटकों को भी सामना करना पड़ रहा होगा। चिकित्सा परामर्श के अभाव में हो सकता है कई लोग दम तोड़ चुके होंगे। अथवा आर्थिक रूप से कमजोर तबकेे के लोग महानगरों में जाकर चिकित्सा पद्धति महंगी होने पर वे समर्थ नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में उन्हें स्थानीय स्तर पर ही महानगरों की सी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। इसी उद्देश्य को लेकर अस्पताल की पृष्ठ भूमिका तैयार हुई। फिर ग्लोबल अस्पताल बना। आवश्यकतानुसार अस्पताल की शाखा आबूरोड में भी स्थापित हुई। हॉल ही में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापन का शिलान्यास हुआ।भारतीय संस्कृति का विदेशों में बजाया डंकाबीके निर्वैर ने 1982 में पहली बार युनाईट स्टेट व यूरोपीय देशों का भ्रमण किया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ मुख्यालय में विश्व शान्ति के लिए निशस्त्रीकरण विषय पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन में उपस्थित दुनिया भर के उच्च कोटि के विद्वानों, वैज्ञानिकों को विश्व शान्ति व मानवीय एकता के लिए अस्त्र-शस्त्रों के बजाए विश्व बधुंत्व बनाए रखने को मानवीय वैचारिक धरातल को बदलने की जरूरत पर बल दिया। कई बार उन्होंने वैश्विक भ्रमण कर भारतीय पुरातन दैवी संस्कृति का प्रचार प्रसार किया।

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