कर्मों से होती है मनुष्य की पहचान – बीके शशि प्रभा ।
सिरोही, राजस्थान ।
रिपोर्ट किशनलाल दहिया ,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी शशिप्रभा ने कहा कि मनुष्य की पहचान कर्मों से होती है। कर्म कोई छोटा बड़ा नहीं होता बल्कि श्रेष्ठ मानसिकता से किए गए कर्म मनुष्य को महान बनाते हैं। संकुचित विचारधारा जीवन की प्रगति के लिए बाधक है। श्रेष्ठ कर्मों का आधार सकारात्मक मनोवृत्ति है। वे शुक्रवार को संगठन के अतंर्राष्ट्रीय मुख्यालय पाडंव भवन परिसर में श्रमिकों को गर्म ऊनी कंबल वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी ।
उन्होंने कहा कि बिना किसी फल की इच्छा, भेदभाव, छोटे-बड़े की सच्चे दिल से सेवा कर उन्हें राहत प्रदान करने की नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से ही पुण्य अर्जित होता है। श्रेष्ठ वृति से रूहानी वायब्रेशन व सुखदायी वायुमडंल निर्मित होता है। हर व्यक्ति को श्रेेष्ठ कर्मों के लिए प्रोत्साहित रहना चाहिए।राजयोग प्रशिक्षिका बीके ऊर्वशी बहन ने कहा कि कर्मविधान का सही ज्ञान होने से शुभ भावना के साथ किए गए कर्म के अनुरूप ही श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है। श्रेष्ठ भावना की मानसिकता होने से संकुचित विचारों को समाप्त किया जा सकता है। शुभ संकल्पों को मन में बार-बार दोहराते हुए उन्हें मूर्तरूप देने के पुरूषार्थ में तत्पर रहना चाहिए।
इस अवसर पर बीके अशोक उपाध्याय, बीके बनारसी, बीके रवि कानाडे, बीके चंद्रशेखर सांगप्पा, बीके चंद्रपाल, बीके शशिकांत आदि ने विचार व्यक्त करते हुए श्रमिकों को व्यसनों से मुक्त रहने, सर्दी के दिनों में स्वास्थ्य दुरुस्ती, पारिवारिक रिश्तों में आपसी तालमेल बनाये रखने पर बल दिया।
आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को कंबल वितरित करती ब्रह्माकुमारी संगठन की संयुक्त मुख्य प्रशासिका बीके शशि प्रभा व अन्य।

