सिरोही/ राजस्थान ,
सड़क पर बैठे आवारा पशुओं का आखिर दोषी कौन ?
सरकारी आदेशों की नही हो रही है पालना , जिम्मेदार बैठे है आंखे मूंद कर , आखिर मूक बधीर जीवों की रखवाली का कौन करेगा न्याय ? क्या यूं ही सड़को पर भटकता रहेगा यह पशुधन ?
हर जगह सड़क पर बैठते आवारा पशु आपको मिलते हुए नजर आएंगे सब लोग दोष ग्राम पंसायत नगर पालिका को दोष देते है मगर इनका असली दोषी आखिर कौन है आये दिन ये सड़क पर बीचो बीच बैठे हुए होते है और दुर्घटना होती है बहुत सारो को अपनी जान तक गवानी पड़ती है मगर सब दोष पंसायत व नगर पालिका को देकर इतिश्री कर लेते है मगर असली दोषी तो उन आवारा पशुओं के उनके मालिक है जो उनको खुला छोड़ देते है क्यो की पशुओं का दोष ये होता है कि उन्होंने या तो दूध देना बंद कर दिया है या व बूढ़े जो गए है जब वे ही आवारा पशु सड़क पर दुर्घटना के शिकार होते है तो पैसे लेने उनके मालिक पहुच जाते है
इसका ताजा उदाहरण है कि लम्पि बीमारी जब हुई तो लोगो ने उन बेजबान पशुओं को मरने के लिये खुला छोड़ दिया और जब उस पशु का सरकार ने मुहावजा देने की घोषणा की तो कब्र मेसे उस पशु के कानों का टैग लाकर मुहावजा उठा दिया। सरकार को उनके लिए पशु गणना में कानो में नम्बर का टैग लगाया है तो सरकार को इन आवारा पशुओं को उस टैग के आधार पर उन मालिको को पकड़ना चाहिए और उनको बांड करवा कर घर मे बांधना चाहिए ताकि आम जनता को इन पशुओं से अभी दुर्घटना न हो सके या पशु क्रूरता नियम के तहत इनके खिलाफ कारवाई करनी चाहिए जिससे इन बेजबान पशुओं को भी न्याय मिल सके।
