अध्यात्म के साथ की गई समाज सेवा से जागृत होती है सुधैव कुटुम्बकम् की भावना – सरवटे
ज्ञान सरोवर में समाजसेवकों का राष्ट्रीय सम्मेलन आरंभ
माउंट आबू, 08 जुलाई।
रिपोर्ट किशनलाल ,
राजस्थान अनुसूचित जाति आयोग उपाध्यक्ष सचिन विष्णुदेव सरवटे ने कहा कि अध्यात्म के साथ की गई समाज सेवा से वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना जागृत होती है। जीव-जन्तुओं से लेकर मानव, प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण समेत सामाजिक सेवाओं के बढ़ते दायरे के उत्थान के लिए सच्चे समाजसेवक के मन में किसी तरह का भी भेदभाव नहीं होता है। इसी परिपाटी को सामने रखते हुए विश्वव्यापी ब्रह्माकुमारी संगठन की ओर से की जा रही सेवाओं की बदौलत समाज के हर तबके को एकता के सूत्र में पिरोने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। समाज सेवा में कई प्रकार की आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है लेकिन सच्चा समाजसेवक उसकी परवाह किए गए बगैर उनसे प्रभावित न होकर अपनी मंजिल की ओर बढऩे में अग्रसर रहता है। वे शनिवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के समाज सेवा प्रभाग द्वारा ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में ईश्वरीय योजना के अंतर्गत मूल्य आधारित समाज की पुनस्र्थापना विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी संतोष बहन ने विषय विकारों पर जीत पाने के उपाय सुझाते हुए स्वयं को परिवर्तन करने की शक्ति अर्जित करने के लिए आत्मा को परमात्मा से जोडऩे से सरल तरीके बताये। संपूर्ण निर्विकारिता आत्मा के मूल संस्कार हैं। सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान, शक्ति आत्मा के निजी गुण हैं। ईश्वर की याद से ही सदगुणों की प्राप्ति होती है।नेपाल नारायणगढ़ से आए मित्र मिलन समाज अध्यक्ष बालाराम जोशी ने सामाजिक रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए छोटी से छोटी समाज सेवा में भी अपनी सहभागिता बनाए रखने पर बल दिया।अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक रोटेरियन सरजीव पटेल ने कहा कि अनावश्यक संग्रह की बढ़ती प्रवृत्ति समाज सेवाओं के क्षेत्र में बाधक बन जाती है। ईष्यावश प्रलोभनों के पूर्वाग्रह से ग्रस्ति समाज की अंतर्मात्मा को मूल्यों से सुशोभित करने के लिए स्वयं के अंदर प्रेम, करूणा, दया, अङ्क्षहसा और सत्य के प्रति हमेशा अडिग रहने से ही मूल्यनिष्ठ समाज पुनस्र्थापित किया जा सकता है।दिल्ली से आये प्रख्यात समाजसेवक डॉ.जी.पी. भगत ने ब्रह्माकुमारी संगठन के प्रशिक्षित राजयोग के माध्यम से मूल्यों को आत्मसात कर माता-पिता, परिवार, समाज, हर मानव का सम्मान करने की मानसिकता के साथ निरंतर समाज सेवा में अपनी सहभागिता बनाए रखने की बात कही।प्रभाग के उपाध्यक्ष प्रेम ङ्क्षसह ने सम्मेलन की महता पर प्रकाश डालते हुए जीवन को सामाजिक सरोकारों के लिए सशक्त बनाने के लिए राजयोग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने पर बल दिया।प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक बीके अवतार ने जीवन को अध्यात्म से सराबोर करने के लिए सम्मेलन सहभागियों को प्रेरणास्पद अनुभव सांझा किए।प्रभाग की अतिरिक्त राष्ट्रीय संयोजिका बीके वंदना बहन, दिल्ली क्षेत्रीय संयोजिका बीके आशा बहन, मुख्यालय संयोजक बीके वीरेंद्र आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व दीप प्रज्जवलन के साथ सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया गया।

