एक दिवसीय राष्ट्रीय लोक अदालत 11 फरवरी को, राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार बेंचो का गठन।

सिरोही(हरीश दवे),

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिले विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही के तत्वाधान में 11फ़रवरी को सम्पूर्ण सिरोही जिले के सभी न्यायिक एवं राजस्व न्यायालयों, उपभोक्ता फोरम, श्रम विवाद , जनोपयोगी सेवांओं संबंधी प्रकरण के लिए वर्ष 2023 की प्रथम एक दिवसीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा जिसमें सिरोही जिला मुख्यालय पर 4 एवं तालुका स्तर पर 7 कुल 11 बैंचों का गठन किया गया है।।प्राधिकरण के सचिव श्री रामदेव सांदू ने बताया कि उक्त लोक अदालत का आयोजन कोविड 19 के दृष्टिगत रखते हुए आनलाईन एवं आफलाईन दोनो माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत हेतु अब तक कुल 12219 प्रकरण रैफर किए जा चुके है एवं अभी भी प्रकरण चिन्हित किए जा रहे है।उन्होंने बताया कि यह राष्ट्रीय लोक अदालत किसी विषय विशेष के प्रकरणों के लिए सीमित न होकर सभी प्रकार के उपयुक्त प्रकरणों जिनमें प्री-लिटिगेशन एवं न्यायालयो में लंबित विभिन्न प्रकृति के मामले है।प्री-लिटिगेशन के अन्तर्गत निम्न प्रकृति के प्रकरण शामिल है:-किसी नागरिक एवं सरकार या उसके किसी विभाग/उपक्रम के मध्य सभी प्रकार के विवाद (राजस्थान लिटिगेषन पाॅलिसी, 2018 के तहत निराकरण के प्रयास), मोटर दुर्घटना दावों से संबंधित क्लेम के विवाद, घातक दुर्घटना अधिनियम से संबंधित क्लेम के विवाद, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के विवाद, धन वसूली के सभी प्रकार के विवाद, वसूली के हर प्रकार के मामलों सहित), गृहकर /नगरीय विकास कर जो स्थानीय निकायों द्वारा वसूल किया जाता है),शहरी जमाबंदी डवलपमेन्ट अथाॅरिटीज/यूआईटी द्वारा वसूल की जाती है), फसल बीमा पाॅलिसी से संबंधित विवाद, व्यापारिक प्रतिष्ठानों एवं ग्राहकों के मध्य विवाद, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवाद, पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं यथाय निर्माण श्रमिक षिक्षा व कौषल विकास योजना, प्रसूति सहायता योजना, हिताधिकारी की सामान्य अथवा दुर्घटना में मृत्यु या घायल होने की दषा में सहायता योजना, सिलिकोसिस पीड़ित हिताधिकारियों हेतु सहायता योजना, शुभ शक्ति योजना, निर्माण श्रमिक सुलभ्य आवास योजना, निर्माण श्रमिक औजार/टूलकिट सहायता योजना, निर्माण श्रमिक जीवन व भविष्य सुरक्षा योजना, निर्माण श्रमिक एवं उनके आश्रित बच्चों द्वारा भारतीय/राजस्थान प्रषासनिक सेवा हेतु आयोजित प्रारम्भिक प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने पर प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के पुत्र/पुत्री का आई.आई.टी./आई.आई.एम. में प्रवेष मिलने पर ट्यूषन फीस की पुनर्भरण योजना, निर्माण श्रमिकों को विदेष में रोजगार हेतु वीजा पर होने वाले व्यय की पुनर्भरण योजना एवं निर्माण श्रमिक अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं हेतु प्रोत्साहन योजना, आदि से संबंधित लम्बित प्रार्थना-पत्र, बिजली, पानी, मोबाईल, क्रेडिट कार्ड एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित विवाद, भरण-पोषण/बालकों की अभिरक्षा से संबंधित सभी प्रकार के विवाद, सभी प्रकार के राजस्व विवाद ख्सीमाज्ञान (पैमाइश)/पत्थरगढ़ी/जमाबन्दी- रिकाॅर्ड शुद्धि/नामान्तरण/रास्ते का अधिकार, सुखाचार एवं डिवीजन आॅफ होल्डिंग सहित,, अन्य सभी प्रकार के सिविल विवाद, सर्विस मैटर्स के विवाद (पदोन्नति एवं वरिष्ठता संबंधी विवादों को छोड़कर), उपभोक्ता विवाद, जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवाद, अन्य राजीनामा योग्य विवाद (जो अन्य अधिकरणों/आयोगों/मंचों/ अथाॅरिटी/आयुक्त/प्राधिकारियों के क्षेत्राधिकार से संबंधित हैं)प्री-लिटिगेशन एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा किसी न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने से पहले ही आपसी सुलह करवाकर विवाद का निस्तारण किया जा सकता है।लम्बित प्रकरणों के अन्तर्गत निम्न प्रकृति के प्रकरण शामिल है:-किसी नागरिक एवं सरकार या उसके किसी विभाग/उपक्रम के मध्य लम्बित सभी प्रकार के प्रकरण (राजस्थान लिटिगेषन पाॅलिसी, 2018 के तहत निराकरण के प्रयास), राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरण, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम (छप् ।बज) के प्रकरण, धन वसूली के सभी प्रकार के प्रकरण दीवानी वाद/इजराय/आर्बिट्रेषन अवार्ड की इजराय/ तहत वसूली के हर प्रकार के मामलों एवं बैंक के विवाद सहित,, सभी प्रकार के अन्य सिविल मामले (किरायेदारी, बंटवारा, हिसाब फहमी, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, घोषणा, क्षतिपूर्ति एवं विनिर्दिष्ट अनुपालना के दावों) सहित, एम.ए.सी.टी. के प्रकरण, घातक दुर्घटना अधिनियम से संबंधित प्रकरण, श्रम एवं नियोजन संबंधी प्रकरण, कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के प्रकरण, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित प्रकरण, वैवाहिक विवाद के प्रकरण (तलाक को छोड़कर), बालकों की अभिरक्षा से संबंधित प्रकरण, भरण-पोषण सम्बन्धित प्रकरण, भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से संबंधित प्रकरण, सभी प्रकार के सर्विस मैटर्स (पदोन्नति एवं वरिष्ठता विवाद के मामलों के अलावा), वाणिज्यिक विवाद से संबंधित प्रकरण, गैर सरकारी शिक्षण संस्थान के विवाद से संबंधित प्रकरण, सहकारिता सम्बन्धी विवाद से संबंधित प्रकरण, परिवहन सम्बन्धी विवाद से संबंधित प्रकरण, स्थानीय निकाय (विकास प्राधिकरण/नगर निगम, आदि) के विवाद से संबंधित प्रकरण, रियल एस्टेट सम्बन्धी विवाद से संबंधित प्रकरण, रेलवे क्लेम्स सम्बन्धी विवाद से संबंधित प्रकरण, कर सम्बन्धी विवाद से संबंधित प्रकरण, जन उपयोगी सेवाओं संबंधी विवाद से संबंधित प्रकरण, उपभोक्ता एवं विक्रेता/सेवा प्रदाता के मध्य के विवाद से संबंधित प्रकरण, अन्य राजीनामा योग्य ऐसे मामले जो अन्य न्यायाधिकरणों/आयोगों/मंचों/ अथाॅरिटी/प्राधिकारियों के समक्ष लंबित हैं। राजस्व न्यायालयों में:-सभी प्रकार के राजस्व मामले सीमाज्ञान (पैमाइश)/पत्थरगढ़ी/नामान्तरण/ राजस्व अभिलेख में सुधार/डिवीजन आफ होल्डिंग/निषेधाज्ञा/घोषणा/ रास्ते के विवाद से संबंधित प्रकरणों सहित,। कार्यपालक मजिस्ट्रेट्स के यहां:- निरोधात्मक कार्यवाही (चतमअमदजपअम चतवबममकपदहे) से संबंधित समस्त मामले (धारा 107/116/151 द.प्र.सं. के मामलों सहित)।श्री सांदू ने पक्षकारो से अपील की है कि पक्षकारान् समय रहते न्यायालय में लम्बित अपने प्रकरण को लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित करवाकर इस अवसर का लाभ उठावें। उन्होने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत अथवा मासिक लोक अदालतो के माध्यम से अपना प्रकरण निस्तारित करवाने पर पक्षकार को निम्नानुसार फायदे मिलते है:-‘‘प्रथमतः सस्ता एवं सुलभ न्याय, द्वितीय: सिविल कोर्ट के आदेश की तरह पालना, तृतीय: कोर्ट फीस की वापसी, चतुर्थ: अन्तिम रूप से प्रकरण का निपटारा, पंचम: समय की बचत। ’’पक्षकारान् स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से भी अपने प्रकरण को राष्ट्रीय लोक अदालत हेतु रैफर करवा सकते है। अधिक जानकारी के लिए पक्षकारान् जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सिरोही के दूरभाष 02972-294034 पर संपर्क कर सकते है। 

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