राजीव नगर आवासीय योजना, एससी खातेधारक की भूमि पर लाल फीताशाही का झोल,क्या आम जन व एससी खातेधारक को मिलेगा न्याय।
सिरोही(हरीश दवे)- राजीव नगर आवासीय योजना के लिये स्थानीय प्रशासन ने वर्ष 1988-89 में एससी-एसटी की कृषिभूमि लेने की गम्भीर कानूनी भुल की थी । उन भूलो को छुपाने/ दबाने के लिये 34 वर्ष से इस भुल को लगातार विवादो में उलझा कर स्वार्थी तत्व अपने हित साध रहे है जबकि इसको को निपटाने के लिये पहले दिन से विक्रय-विलेख-253/ 1989 के पेरा 4 पर नगरपालिका ने शर्त अंकित कर दी थी कि खातेदारी विवाद उत्पन्न होने पर एससी खातेदार से विक्रय रकम वापस ले ली जायेगी। उसके बाद राज्य सरकार ने भी राजस्व ग्रुप-6 विभाग से राज्यादेश दिनांक 13.11.2006 जारी कर इस भूमि में एससी खातेदार को वापस पुर्ववत कायम करके प्रकरण का पुर्णतया करा दिया था। उसी क्रम में गैरएससी (कानूनन अतिक्रमी) नगर परिषद ने भी दिनांक 03.10.2013 को एससी के पक्ष में प्रस्ताव पारीत कर एससी के पक्ष में हक त्याग कर लिया, सारे वाद-विवाद समाप्त करने का निर्णय लिये और विक्रय प्रतिफल रकम वापस लेने का सुचना मांग पत्र क्रमांक 5288 दिनांक 31.12.2013 भी जारी कर दिया था, जिसका निदेशक (DLB) जयपुर ने प्रस्ताव का अनुमोदन कर पत्रादेश दिनांक 01.10.2015 को जारी कर विवाद को प्रस्तावानुसार निस्तारण करने के आयुक्त को स्पष्ट निर्देश पारीत किये है। उस पत्र को से.नी.लिपिक रामलाल मेघवाल ने फाइल में चलाकर रकम वापस लेना निर्णय भी ले लिया था, फिर वो प्रस्ताव निदेशक पत्र की चलाई फाइल नगर परिषद आये दिन पत्र- पत्रावली नहीं मिलने के नाटक चलते रहते है। वैसे नगर परिषद की ओर से भी प्रकरण निवारण के उक्त बिंदु एकदम क्लीयर है, और एससी जाति वर्ग का वसीयत अनुसार छगनलाल मेघवाल एवं एससी जाति वर्ग का चिमनाराम मिणा व उनके परिवार जन इस भूमि के खातेदार- मालिक है, सारे रेकर्ड मे है, फिर भी आने वाले नये बोर्ड नई बात, एक ही भूमि के नये-2 व बार बार अलग-अलग प्रस्ताव पारित कर रहे, अपने-2 हिसाब की विवाद-डफलीयां डमरु बजाकर इस जमीन व इसके एससी को लुटने की बदनियत खोटे डोरे डालते रहते है। इस योजना में बिना भूमि नामांतरण कराये पूर्व में भी अध्यक्ष स्व. वीरेंद्र मोदी व बाद मे आये सुखदेवआर्य ने आयकर भवन, स्कूल भवन दे दिये, फिर सभापति ताराराम माली ने हाईकोर्ट जोधपुर में प्रकरण निर्णयाधिन (Sub judice) होने के बाद भी एससी की भूमि गैरएससी मयों को निलामी करके पट्टे व निर्माण परमीशन तक देकर पक्के निर्माण करवा दिये, जिसको निरस्त रद्द करने के लिये सरकार ने राजस्व ग्रुप-7 द्वारा भी पत्रादेश दिनांक 04.04.2019, जिला कलेक्टर को जारी किये, जिसकी पालना कराने के लिये तहसीलदार को भी एसडीओ ने पत्रादेश विधि/1009 दिनांक 14.06.2019 को जारी कर पाबंद किया था। यह भूमि एससी की भूमि होने और विक्रय प्रतिफल राशी रुपये 739200/- नगरपरीषद देने का संपूर्ण खुलासा एसडीओ ने उनके पत्र दिनांक 15.06.22 में किया है। फिर भी नगर परिषद के विधिक सूत्र एसडीएम में केस जीतने की बता रहे। एससी पक्षें एसडीओ खुद ने तो पहले ही एक विधिक पत्र रिडर/ 189 दिनांक 31.10.08 प्रषित किया, जिसमें नगर परिषद के विक्रय-विलेख को ही प्रारंभ से विधिशून्य (फियुज) होने का खुलासा किया है और दिनांक 14.06.2022 को नगर परिषद से एससी के पक्ष में आयुक्त से आवश्यक विवरण सूचना मांगी थी, जिसका बिना जबाब दिये ही कांग्रेस शासीत मेवाडा बोर्ड, रिटायर महेंद्र चोधरी, वर्तमान आयुक्त, एससी-एसटी को नुकसान पहुंचाने वाली विरोधी टिम, एससी-एसटी को कमजोर मानने वाले सरकारी राजस्व अधिकारी/ कर्मीक व नगर परिषद के गलत को साथ देने वाले साथी-सहयोगी लोग ने जिदी मिलिभगत करके इस योजना में पहले भी विधि विरुद्ध निलामी और अब आगे भी इस भूमि को बिना उचित न्याय- निर्णय कराये लुटने की बदनियत सोच बना रखी है। भारी भी पड सकता है। बोर्ड ने हाल में ही दिनांक 17.11.2022 को भी आम सभा में योजना ही निरस्त करने का प्रस्ताव लिया है।जब यह भूमि अब तक नगर परिषद की हुई ही नहीं है, तो फिर कानून में छेद करने वाले, राजनितिकरण कर नाजायज जिद की हठधर्मीता में सिरोही में एससी-एसटी विरोधी कांग्रेस शाशित बोर्ड (गैरएससी व अतिक्रमन सरंक्षण कारी बोर्ड) की भुख भी खत्म नहीं हुई, तो दबे-कुचले दलित हो या मजबुर सरकारी अधिकारी/ कर्मीक हो, ऐसे विधि विरुद्ध जाकर एससी का अहित करके एससी की कृषि भूमि पर गांधीवादी अहिंसक सरकार का नाम लगाकर बदनाम करना। राजीवनगर नाम का जनता को झुठा कांच दिखाना है। अब नगर की जनता व राजीव नगर आवास योजना में भरम की स्तिथि बन गई है।क्या अजा खातेदार के हितों की रक्षा होगी? राजीब नगर आवासीय योजना में कमजोर आवेदकों को घर मिलेंगे? या एससी के कानून की रक्षा होगी।

