भगवान विष्णु के ऋषभ अवतार में उनके पुत्र चक्रवर्ती नरेश के नाम पर देश का नाम भारत:-श्री संतोष सागर।

सिरोही , राजस्थान

(हरीश दवे)

ओमकार सेवा संस्थान चेरीटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सनातनधर्म यात्रा के 27 वें पड़ाव के अंतर्गत सनातन धर्म यात्रा आयोजन समिति सिरोही के तत्वावधान में प्रातः पूज्य भाई श्री संतोष सागर जी महाराज ने प्रथमेश गार्डन में आज चतुर्थ दिवस की कथा सुनते हुए ऋषभ अवतार की कथा सुनते हुए कहा की वे नित्य अपनी प्रजा और पुत्रों को नित्य सदोपदेश सत्संग देते उनके पुत्र हुए चक्रवर्ती सम्राट भरत हुए जिनके नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा। जो ज्ञान प्राप्त करने में लीन रहे उसे भारत कहते है।हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता है यहां अनाज के बदले सोना दे दिया जाता था विश्व गुरु है हमारा भारत। राजा भरत का मोह एक मृत मृगी के बच्चे में होने के कारण उन्हें मृग योनि में जाना पड़ा।महाराज श्री ने राजा जड़ भरत की भी कथा सुनाई। भाई श्री ने प्रहलाद चरित्र कथा वामन अवतार, समुंद्र मंथन , मोहिनी अवतार, गजेंद्र मोक्ष तथा रामावतार की कथा सुनाई।आज कथा में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया गाय भगवान कृष्ण वासुदेव की सुंदर झांकी सजाई गई।कथा प्रारंभ से पूर्व प्रातः आयोजित लक्ष्मी एवं विष्णु सहस्रनाम यज्ञ में मुख्य यजमान कैप्टन नरेंद्र पाल सिंह के साथ आरती के यजमान सुनील गुप्ता एवं दुदाराम राजपुरोहित मंगला सरिया द्वारा सपत्नीक यज्ञ में आहुतियां दी गई। सनातन धर्म यात्रा का रथ आज गीता के प्रचार प्रसार के लिए सिरोही माली समाज छात्रावास पहुंचा, जहां भाई श्री संतोष सागर जी महाराज ने सेंकड़ों युवाओं को संबोधित करते हुए कहा की जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आत्मबल सबसे जरूरी है जो हमे अध्यात्म व गीता से प्राप्त होता है। गीता को जीवन में सबसे बड़ा मैनेजमेंट गुरु बताया । यात्रा संयोजक शिव कुमार तिवाड़ी ने यात्रा के उद्देश्य की जानकारी दी।

आज की आरती एवं प्रसाद के यजमान कुसुम काशीवा धर्मपत्नी डाक्टर बलबीर काशीवा, प्रीतम काशिवा । मगन माली एम बी फ्रूट, माता टीपू देवी द्वारा सात दिन की फल प्रसाद की घोषणा की गई । कथा में शांतिलाल माली, गायत्री देवी शर्मा, , मीरा शर्मा, नटवर अवस्थी, हमीर सिंह राव, ओंकार सिंह उदावत, राजेंद्र सिंह राठौड़, सुनील गुप्ता, अथर्व राज, घनश्याम मिश्रा, सरिता मिश्रा, शंकर लाल रूपा जी माली, प्रताप माली, चेता राम माली, बाबू लाल माली, देवा राम माली, आलोक शांतिलाल माली सवना, भगवतीलाल ओझा, कारण सिंह डाबी फौजी, मोहन लाल माली एवं सैकड़ों भक्त माताएं बहनें एवं श्रोता मौजूद रहे।

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