सिरोही /राजस्थान ।

हरिश दवे,

क्या राजीब नगर आवासीय योजना में आवेदकों को भूखंड मिल पाएंगे ?

सरकारी महकमो की टालमटोल नीति से अनेक जनो के हक प्रभावित,

नगर परिषद क्षेत्र में नियमो के विपरीत निर्माण को खुला सरंक्षण। सिरोही(हरीश दवे)

तीन दशक से दो विभागों व जनप्रतिनिधियों के साथ लालफीताशाही की शिकार सिरोही नगरपरीषद की राजीव नगर आवासीय योजना वाली एससी की कृषि भूमि को आंख मीच स्वयं की आबादी भूमि बता रहे है। दुसरी ओर राज्य सरकार व राजस्व अधिकारीयों के हिसाब से यह कृषि भूमि एससी को होने से योजना के प्रभारी अधिकारी एसडीओ, सिरोही ने इस योजना भूमि के निर्णयाधिन होने संबंधित विधिक बिदुओ पर आवश्यक विवरण मांग-पत्र (Essential Details Sought) दिनांक 14.06.2022 को जारी कर रखा था, जिसका जबाब भी देना नगर परिषद के पुराने व अभी के आयुक्तों ने सत्ताधिश बन देना उचित नहीं समझा और बिना जबाब दिये ही राजीवनगर में मकान भूखंड आवंटन करने की कार्यवाही करना और कानूनी स्पष्टता किये बिना ही एससी की इस भूमि को नगर परिषद की राजनीतिक प्रयोगषाला की द्रोपदी बना-बता कर सबको भ्रमित कर चिर हरण करना खुद के पांव में कुल्हाडी व आवेदकों के साथ धोखा, एससी के साथ अत्याचार व अपराध कर रहे है। साथ ही एससी पक्ष के सभी राज्यादेशों, कानूनी प्रावधानों, विचाराधीन न्यायिक प्रक्रिया व न्यायालयों सबकी खुली अवमानना, अवहेलना और धज्जीयां उडाने का कुकृत्य किया व कर रहे है।सभी जानते है कि राजस्थान में एससी की कृषि भूमियों का अंतरण किसी भी निति-नियमों में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष किसी भी तरह से गैरएससी व्यक्ति अथवा संस्था नाम नहीं हो सकता है, जिसके लिये राज्य सरकार समय-२ पर एससी-एसटी के हित रक्षण और इस प्रकरण के संबंध में भी कई परिपत्र व राज्यादेश अबतक जारी किये गये है, तथापि इस प्रकरण में स्थानीय प्रशासन एससी की भूमि को नगरपरिषद की मान बेठे है और इस कुचक्र में स्थानीय प्रशासन द्वारा अबतक बहुत कुछ दो-दो बार किया व चलाया जा रहा है,

जैसे (i) प्रकरण के निस्तारण संबंधित राज्य सरकार के एससी पक्ष के दो-२ बार स्पष्ट राज्यादेश- पहला ग्रुप-6 से दिनांक 13.11.2006 और दुसरा ग्रुप-7 से दिनांक 04.04.2019 की पालना आधी-अधुरी व विपरित की जाती रही है,

(ii) नगर परिषद से भी दो-२ बार प्रस्ताव पारित किये गये। पहला दिनांक 03.10.2013 को, जिसमें जमीन के एससी के पक्ष में नगरपरिषद ने हक त्याग किये तथा संबंधित सभी वाद-विवाद विड्रो- समाप्त करने के निर्णय लिये गये और अब की बार दि 17.11.2022 को राजीव नगर योजना को ही निरस्त कर दिया है। इसी प्रकार

(iii) स्थानीय राजस्व विभाग ने भी एससी की यह भूमि निति-नियमों में सुराख करके गैरएसी को भूमि जबरन दिलाने के अंधमोह में विधि शून्य दस्तावेज को विधि विपरित झुठी मान्यता देकर गैरएससी के नाम दो-दो बार भूमि नामांतरण 2427 व 2220 खोले गये इत्यादि। (ऐसे अंधमोह में पहले भी गैरएससी नाम विधि विपरीत भूमि नामांतरण 2427 को करने वाले उत्तरदायी पटवारी, आरआई व तहसीलदार के खिलाफ प्रवर्तित अनुशासनात्मक (विभागिय) कार्यवाही भी की गई थी।

नगर पालिका ने (i) वर्ष 1989 को इस भूमि का एससी से विक्रय विलेख 253/1989 दिनांक 06.05.1989 को पंजीकृत कराया, जिसके पेरा 4 में शर्त लिखी कि “खातेदारी विवाद होने पर विक्रय रकम वापस देना होगा”।

(ii) नगरपरिषद ने भी इस भूमि के वसीयत वाले एससी सदस्य छगनलाल मेघवाल को पारित संकल्प दिनांक 03.10.2013 की प्रमाणित प्रति देकर विक्रय राशी वापस लोटाने का पत्रादेश दिनांक 31.12.2013 को जारी कर दिया था।

साथ ही (iii) प्रस्ताव का अनुमोदन करके निदेशक स्वायत्त शासन (डीएलबी), जयपुर ने भी विक्रय राशी वसीयत वाले से लेकर प्रस्तावानुसार प्रकरण का निस्तारण करने संबंधित विस्तृत निर्देश पत्र दिनांक 01.10.2015 को जारी कर रखा है।

(iv) इसके अलावा अबतक के जारी महत्वपूर्ण परिपत्रों/ राज्यादेशों पर नजर डाले तो ग्रुप-6 ने दिनांक 19.11.2005, 15.09.2006, 13.11.2006, 30.05.2022, ग्रुप-7 ने दिनांक 05.02.2013, 04.04.2019, 02.08.2021 और राजस्थान सरकार वित्त (कर) विभाग, जयपुर से दिनांक 03.12.2021 आदि सभी एससी खातेदार के पक्ष में जारी किये है। इस भूमि प्रकरण संबंधित उपरोक्त सारे दस्तावेजात व पत्रादेश नगरपरिषद एवं राजस्व रेकर्ड में उपलब्ध है।एससी की इस कृषिभूमि को लेकर वास्तविक विवाद दोनों सरकारी विभाग के बिच में निराधार तीन दशकों से चला आ रहा है, जिसमें एक तरफ स्थानीय राजस्व विभाग और दुसरामी ओर नगरपरिषद है, ऐसे में वर्तमान आयुक्त और इससे संबंधित स्थानीय राजस्व अधिकारी गण एकमत होकर इस प्रकरण संबंधित प्रचलित प्रावधानों/ निति-नियमों, राजस्व रेकर्ड और सरकार द्वारा जारी उक्त सभी महत्वपूर्ण परिपत्रों/ राज्यादेशों का आवलोकलन करके खुद को व जनता को अंधेरे में नहीं रखकर इमानदारी से इस कृषिभूमि व राजीवनगर योजना से संबंधित नगर हितों व एससी हितों की जो भी सच्चाई हो, वो एकमत होकर स्पष्ट करना सबके हित में होगा।

एक तरफ राज्य सरकार अपनी सफलता के चार साल का जश्न मना रही है वही कोंग्रेस शाषित बोर्ड में अनाधिकृत बांध काम व लाखो की राजस्व चोरी कर बिला नाम व ओसीएफ की करीब 22 हजार स्क्वायर फिट भूमि संन्ख्या 144 से 147,149,150,206,214 में भी नियमो के विपरीत अनाधिकृत कार्यो पे आयुक्त मौन है।

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