सुख व दुख कर्मो का फल और अनुभूति शरीर का विषय आत्मा का नही:-श्री संतोष सागर।
सिरोही /राजस्थान ।
ओमकार सेवा संस्थान चेरीटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सनातनधर्म यात्रा के 27 वें पड़ाव के अंतर्गत सनातनधर्म यात्रा आयोजन समिति, सिरोही के तत्वावधान में सुंदर भागवत कथा का रसपान हुआ । पूज्य भाई श्री संतोष सागर जी महाराज ने प्रथमेश गार्डन में आज दूसरे दिवस की कथा सुनते हुए कहा भागवत भगवान कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है, शब्द विग्रह है। इसमें 12 अध्याय 335 स्कंध और 18000 श्लोक है । सबसे पहले ये कथा भगवान नारायण के मुख से निकली तो ये विष्णु मुखी कहलाई । गंगा भगवान के चरणों से निकली तो वह विष्णु पदी कहलाई। ब्रह्मा जी ने चतुर्थ श्लोकी कथा नारद को सुनाई।वेद व्यास जी ने चतुर्थ श्लोकी कथा का विस्तार किया और अपने पुत्र सुकदेव जी को प्रदान की ।भाई श्री ने भीष्म पितामह के त्याग की कथा सुनाई। महाराज श्री ने कपिल भगवान देवहूति संवाद दिव्य वर्णन किया। भगवान कपिल में मां को सांख्य शास्त्र का उपदेश देश हुए कहा सुख दुख व्यक्ति के कर्मों का फल है उन्होंने कहा सुख दुख शरीर की अनुभूति है आत्मा का विषय नहीं है। प्रातः नियमित पूजन एवं यज्ञ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 8:30 बजे से 10 बजे तक विश्व कल्याण हेतु प्रथमेश गार्डन में विश्व कल्याण हेतु यज्ञ किया गया।जिसमें कथा के मुख्य यजमान नरेंद्र पाल सिंह नीलम सिंह मीठालाल माली चिराग रेडीमेड आशा माली मधुसूदन त्रिवेदी पूजा त्रिवेदी सहित अन्य भक्तों ने आहुति दी ।
शाम के कथा आयोजन में आज की आरती के यजमान श्रीमती हंशुमती पत्नी महेंद्र कुमार पुरोहित, गायत्री देवी शर्मा धर्मपत्नी डॉक्टर जगदीश प्रसाद शर्मा, मीरा शर्मा, नटवर अवस्थी सहित भजन गायक प्रकाश माली गोयली, शंकर लाल माली, हमीर सिंह राव, ओंकार सिंह उदावत, राजेंद्र सिंह राठौड़, सुश्री हेमलता वर्मा, सुश्री संध्या वर्मा, सुनील गुप्ता, अथर्व राज, घनश्याम मिश्रा, सरिता मिश्रा, दिनेश जैन, भगवतीलाल ओझा, मोहन लाल माली एवं सैकड़ों भक्त माताएं बहनें एवं श्रोता मौजूद रहे।
