सिरोही/ राजस्थान

(हरीश दवे) ,

विधि महाविद्यालय में “सिविल एव आपराधिक विधि के प्रक्रियात्मक स्वरूप को लेकर सेमिनार का आयोजन।

सिरोही(हरीश दवे)

राजकीय विधि महाविद्यालय सिरोही में “सिविल एवं आपराधिक विधि के प्रक्रियात्मक स्वरूप” विषय पर सेमिनार का आयोजन रखा गया। अतिथि व्याख्याता के रूप में भंवर सिंह देवड़ा (अध्यक्ष बार एसोसिएशन सिरोही) इंद्र दान चारण (A. EN), ओम प्रकाश विश्नोई (वरिष्ठ विधि अधिकारी), कैलाश चंद्र नामा(अधिवक्ता), विक्रम सिंह देवल (अधिवक्ता) ने विधि विद्यार्थियों से रूबरू होकर अपने विचार रखें एवं विद्यार्थियों की विधि के प्रायोगिक पहलू से संबंधित जिज्ञासाओं का निवारण किया। महाविद्यालय प्राचार्य विजय कुमार ने समस्त अतिथियों को अपना बहुमूल्य समय निकालकर कार्यक्रम में पधारने के लिए स्वागत और अभिनंदन किया। प्राचार्य ने अवगत कराया कि समय-समय पर विधि विद्यार्थियों के लिए इस तरह के सेमिनार वर्कशॉप एवं अतिथि व्याख्यान का आयोजन कराना अत्यंत आवश्यक है एवं विद्यार्थियों को विधि के प्रायोगिक पक्ष को समझने के लिए अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों एवं औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट को महाविद्यालय में आमंत्रित किया जाता है। मुख्य वक्ता के तौर पर बार एसोसिएशन अध्यक्ष भंवर सिंह विद्यार्थियों को विधि शिक्षा में सैद्धांतिक ज्ञान के अलावा प्रायोगिक पक्ष को समझने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बताया कि विधि के छात्र को अनुशासन एवं प्रोफेशनल एथिक्स का विशेष ध्यान रखना चाहिए मुख्यतः जब वह कोर्ट परिसर में या न्यायालय में उपस्थित हो। श्री ओम प्रकाश जी बिश्नोई द्वारा छात्रों को विधि के क्षेत्र में विभिन्न कैरियर अवसरों के संबंध में जानकारी साझा की गई। विधि के क्षेत्र में बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस करने के अलावा कई कॉन्पिटिटिव एग्जाम्स जैसे न्यायिक सेवा, विधि अधिकारी, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर इत्यादि की तैयारी भी की जा सकती है और विधि के विद्यार्थी जितना जल्दी हो सके अपना लक्ष्य तय करके अभी से मेहनत करना शुरू करें। श्रीमान ने दंड प्रक्रिया संहिता और सिविल प्रक्रिया संहिता की बारीकियों से अवगत कराया जैसे कोर्ट से संबंधित रेवेन्यू से संबंधित जानकारियां दी और साथ ही विद्यार्थियों से कहा कि विधि के क्षेत्र में राह आसान नहीं है इसमें मेहनत से सब कुछ हासिल किया जा सकता है और हिंदी और इंग्लिश भाषा के ज्ञान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता के बारे में बताया। उसके पश्चात विद्युत विभाग से पधारे A.EN श्री आई. डी चारण सर ने जनहानि से जुड़े मामलों उपभोक्ता विद्युत विभाग से संबंधित सुरक्षा और मुआवजा विद्युत चोरी जैसे टॉपिक पर चर्चा की उसके पश्चात फैमिली कोर्ट के एडवोकेट कैलाश चंद्र नामा सर ने व्यापार और व्यवसाय में अंतर को स्पष्ट करते हुए विधि विद्यार्थियों से अच्छे व्यवसाई बनने का आग्रह किया साथ ही सुप्रीम कोर्ट के मामलो का ब्योरा देते हुए पारिवारिक न्यायालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित जानकारियों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। इस कार्यक्रम में विधि प्राचार्य, विधि व्याख्याता नरेश कुमार मीणा, डॉक्टर अनुपमा उज्जवलव, एडवोकेट तरुण हाडा छात्र संघ अध्यक्ष रेखा माली, उपाध्यक्ष प्रदुमन आर्य, संयुक्त सचिव कपिला कवर एवं सभी विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे और विधि विद्यार्थियों द्वारा अतिथि व्याख्याताओं से प्रश्न पूछे गए। अंत में अध्यक्ष राजकीय विधि महाविद्यालय द्वारा सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

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