माउंट आबू /राजस्थान ।
रिपोर्ट किशन दहिया,
व्यर्थ की बीती बातों के चिन्तन से बढ़ती है चिन्तामाउंट आबू, ०७ नवम्बर।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के जर्मनी सेवाकेंद्रों की संचालिका राजयोगिनी सुदेश बहन ने कहा कि नियमित रूप से राजयोग का अभ्यास करने से मनोबल बढ़ता है। राजयोग का अभ्यास हर प्रकार के तनाव से मुक्ति दिलाता है। विकारों के आवरण से मन में छाए अज्ञानता के पर्दे को हटाने के लिए राजयोग करना नितांत आवश्यक है। आत्मज्योति जगाने से ही मानव के मन में छाया अंधकार समाप्त होगा। त्यौहार भारत की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता के समन्वय सेतु व नैतिक मूल्यों की सुरक्षा के साथ राष्ट्रीय एकता के आधार स्तम्भ हैं। जनहित के लिए विधिपूर्वक किया गया कोई भी पुरुषार्थ व्यर्थ नहीं जाता है। वे वे ग्लोबल अस्पताल द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। ब्रह्माकुमारी संगठन की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके शशिप्रभा ने कहा कि बिना किसी अर्थ के बीती बातों का चिन्तन करने से ही जीवन में तनावजन्य परिस्थितियां पैदा होती हैं। स्वयं की आत्मिक शक्तियों पर ध्यान केन्द्रित करने से मन का अंधकार समाप्त हो जाता है। मन की अदम्य शक्तियां जागृत होने से जिन्दगी का हर पल बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकता है। ग्लोबल अस्पताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा ने कहा कि दृढ़ व सकारात्मक संकल्पों के साथ हम अपनी दिनचर्या के हर कार्य में अध्यात्म को जोडऩे का सूत्र सीख लें तो निश्चित रूप से जीवन में अविनाशी शांति परछाई की तरह सदा साथ रहेगी।
मल्टीमीडिया सेवा प्रभाग अध्यक्ष बीके करूणा ने कहा कि अपने जीवन को ईश्वरीय मर्यादाओंके बंधन में बांधने से अनेक प्रकार की मन की उलझन वाले नकारात्मक प्रवृत्तियों वाले सूक्ष्म बंधन समाप्त हो जाते हैं। जिससे मन सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है।महिला सेवा प्रभाग मुख्यालय संयोजिका डॉ. सविता अरोड़ा ने कहा कि जीवन में आने वाले विकटतम चुनौतियों से निपटने के लिए अध्यात्म सशक्त माध्यम है। अध्यात्म की शक्ति मन की सभी प्रकार की विकृतियों को समाप्त करने में सक्षम है।
इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद गर्ग, डॉ. निरंजन उपाध्याय, मनोचिकित्सक डॉ. निखिल पटेल, डॉ. आनंद वी., डॉ. कैलाश कडेल, डॉ. अमिया नाथ पाण्डे, आदि ने विचार व्यक्त किए।
