मारवाड़ के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग ।

सिरोही/ राजस्थान ,(हरीश दवे)

राजस्थान समग्र शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं भारतीय इतिहास संकलन समिति के जिला अध्यक्ष डॉक्टर उदय सिंह डिगार ने मारवाड़ क्षेत्र के इतिहास को स्कूल एवं कॉलेज शिक्षा के पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की मांग उठाई है ।उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर मारवाड़ क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास का पाठ्यक्रम में उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए उसे उचित स्थान दिलवाने की मांग की है ।उदाहरणार्थ उन्होंने बताया कि विगत वैभव चंद्रावती नगरी, जो कि पश्चिमी भारत की व्यापारिक राजधानी थी, परंतु इतिहास के पन्नों में ओझल है। सिरोही जिले के आदिवासी अंचल लिलुड़ी बड़ली नामक स्थान, जिसे क्षेत्र में जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से भी जाना जाता है, परंतु इतिहास के गुमनाम पन्नों में शामिल है। दत्तानी के युद्ध में महाराव सुरतान की सेना ने दिल्ली के बादशाह अकबर की सेना को करारी शिकस्त दी थी, परंतु इस महत्वपूर्ण इतिहास को पाठ्यक्रम में यथा उचित स्थान नहीं मिला है । इसी प्रकार उन्होंने मारवाड़ क्षेत्र के मंडोवर (मंडोर), मालाणी, पोंगल ,लो दरवा, जाबालिपुर (जालौर) श्रीमाल (भीनमाल) सत्यपुर (सांचौर) सुभद्रार्जुन (भाद्राजून) पलिकापुरी (पाली) नाडोलनगरी , सांडेराव, वशिष्ठपूर् (बसंतीदुर्ग )पिंडर वाटिका (पिंडवाड़ा) समेत दर्जनों प्राचीन इतिहास को पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने अवगत करवाया कि आबू इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व का त्रिवेणी संगम रहा है। प्राचीन नव कोटि मारवाड़ की गाथाएं, मारवाड़ क्षेत्र के गौ भक्तों, प्रकृति प्रेमी एवं सांस्कृतिक संवाहक के लोक देवताओं का इतिहास ,दर्जनों महापुरुषों के प्रेरणादायक प्रसंग को पाठ्यक्रम में शामिल करने से भावी पीढ़ी को प्रेरणा मिल सकेगी। डिगार ने मारवाड़ क्षेत्र के प्राचीन बावड़ी और मंदिरों भग्नावशेष प्रस्तर लेखो, राजप्रासादो के गौरवशाली अतीत का मौन साक्षी इतिहास को स्कूल एवं कॉलेज के पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिलवाने की मांग की है।।

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