क्षमा मांगने से ज्यादा ज़रूरी है क्षमा करना – ब्रह्मचारी देवेंद्र भाईजी

खामेमि सव्वजीवे, सव्वे जीवा खमंतु मे।मित्ती मे सव्वभूएसु , वेरं मज्झं न केणई।

अर्थात: सब जीवों को मै क्षमा करता हूं,सब जीव मुझे क्षमा करे। सब जीवो से मेरा मैत्री भाव रहे, किसी से वैर-भाव नही है, मेरे गलतियों के लिए मुझे क्षमा कीजिये।

यह वाक्य परंपरागत जरूर है, मगर विशेष आशय रखता है। इसके अनुसार क्षमा मांगने से ज्यादा जरूरी क्षमा करना है। क्षमा देने से आप अन्य समस्त जीवों को अभयदान देते हैं और उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। तब आप संयम और विवेक का अनुसरण करेंगे, आत्मिक शांति अनुभव करेंगे और सभी जीवों और पदार्थों के प्रति मैत्री भाव रखेंगे। आत्मा तभी शुद्ध रह सकती है जब वह अपने से बाहर हस्तक्षेप न करे और बाहरी तत्व से विचलित न हो। क्षमा-भाव इसका मूलमंत्र है।मिच्छामी दुक्कड़म का अर्थ “मिच्छामी दुक्कड़म” का अर्थ है – कृपया मुझे क्षमा करें। क्या अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से क्षमा मांगना अच्छा नहीं है? यह बहुत महत्वपूर्ण होता है कि सभी अपने नाज़ुक रिश्तों को सुधारें और नकारात्मक संबंधों के रिश्तों को साफ रखें, और घृणा से दूर रहें।दरअसल, “मिच्छामी दुक्कड़म” एक सामुदायिक तरीके से व्यक्तिगत माफी की औपचारिकता है। यह व्यक्तिगत क्षमा की तुलना में मानवीय करुणा को बढाने का एक माध्यम है। इसमें एक संपूर्ण समुदाय शामिल है, एक संपूर्ण समाज। माफी वास्तव में एक सबसे महत्वपूर्ण मानव मूल्य है। यह मानव जाति को उनकी पिछली गलतियों को सुधारने की मौका देता है और मानवता को एक सबक सिखाता है। माफी मांगने में शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं होती है। जब किसी व्यक्ति से क्षमा मांगे तो उसे हमेशा माफ़ कर देना चाहिए।क्षमा मांगने के लिए एक ख़ास दिन क्यों ?गलती करना आसान होता है पर उसे स्वीकारना और उसके लिए क्षमा माँगना इतना आसान नहीं होता …हमारा अहम आड़े आ जाता है , और यही बात क्षमा करने पर भी लागू होती है….लेकिन जब इसी काम के लिए कोई ख़ास दिन रख दिया जाता है तो उस दिन पूरा वातावरण “क्षमा मांगने ” और “क्षमा करने ” के अनुकूल बन जाता है और हम ऐसा आसानी से कर पाते हैं .प्रतिक्रमणप्रति याने वापिस लेना व अतिक्रमण याने अच्छे मूल्यो पे किया आक्रमण। मतलब प्रतिक्रमण रोज करने की क्रिया है जिसमे अपना मन बुरे कर्मों से हटाकर अच्छे की ओर वापिस लेने के लिए भगवान से प्रार्थना करना व गलत कर्मों की क्षमा मांगना होता है ।जो रोज सुबह- शाम मे नही कर सकते, वह पाक्षिक (१५ दिन) या फिर चौमासी (चार महीने मे एक बार) तो करे, ऐसे संकेत है। परंतु कोई इतना भी नही कर सकता तो साल मे एक बार होनेवाला (संवत्सरी) और (अनंत चतुर्दशी) प्रतिक्रमण तो करना ही चाहिए।इसका महत्व इसलिए भी है की (संवत्सरी) और (अनंत चतुर्दशी) प्रतिक्रमण मे किसी भी श्रावक को करने चाहिए वह सारे आवश्यक अनिवार्य धार्मिक संस्कार शामिल है। जिसमे-1) सामायिक- सारे बंध और भाव का त्याग करना।2) चौविसंथो- तीर्थंकर भगवान की भक्ति, आदर, स्तुती करना।3) वांदना – सब गुरु व साधु भगवंतो को वंदन व भक्ति करना।4) प्रतिक्रमण – सब बुरे कर्मोकी क्षमा माँगना, प्रायच्छीत करना।5) कायोत्सर्ग- एकदम पवित्र ध्यान मे तल्लीन रहकर प्रार्थना करना।6) प्रात्यख्यान- बुरे कर्मोसे दूर रहने के लिए मन बनाना, प्रतिज्ञा करना।उत्तम क्षमा यह सॉरी कहने जैसा नहीं है, सॉरी तो हम हर दूसरी बात में बोल देते हैं, ये उससे कहीं बढ़ कर है। क्योंकि यहाँ क्षमा हृदय से और हर तरह की गलती के लिए मांगी जाती है। फिर चाहे वो शब्दों से हुई हो या विचारों से, कुछ करने से हुई हो या अकर्मण्य बने रहने से, जानबूझकर की गयी हो या अनजाने मे। किसी भी प्रकार से यदि मैंने आपको कष्ट पहुँचाया है तो मुझे क्षमा करिए। यह क्षमा सृष्टि के सारे छोटे मोटे जीवो, पेड़ पौधो से भी से भी मांगी जाती है।अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिक्रमण करने से पहले या करने के बाद पूरा वातावरण ‘क्षमा मांगने’ और ‘क्षमा करने’ के अनुकूल बन जाता है और हर कोई दिल से हर किसी से अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हैं । कोई ये नहीं देखता हैं की सामने वाला कौन है, आपसे बड़ा है या छोटा, उसका ओहदा क्या है.. यहाँ तो बस हर कोई अपने अहं को ख़त्म करता हैं और क्षमा मांगता हैं। ऐसा करना निश्चित रूप से आत्मा और मन को शुद्ध बनाता है, एक सुकून सा देता है, दिल पर रखा बोझ ख़त्म करता है और संबंधों को प्रगाढ़ बनाता है। !! “क्षमावाणी दिवस” के पावन पर्व अवसर पर।!! प्रिय आत्मीय…विगत वर्ष में स्वार्थ, प्रमाद, मोह, कषाय से सहित होकर मेरे मन,वचन और काया की कोई भी प्रवृत्ति, जो आपको प्रतिकूल लगी हो, उसके लिए मैं- ब्रह्मचारी देवेंद्र / शुद्धीकरण के लिए मेरे अंतस की गहराइयों से विनम्रतापूर्वक क्षमायाचना करता हूँ।*!! उत्तम क्षमा !!* *!! खमत खामणा !!* *!! मिच्छामि दुक्कड़म !

रिपोर्ट सुरेश पुरोहित

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