गांधी पार्क योग संस्थान ने किया शिक्षकों का सम्मान।

रिपोर्ट, सिरोही(हरीश दवे)

स्थानीय गांधी पार्क योग शिविर संस्थान की प्रेरणा से रोटरी क्लब सिरोही द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव उत्सव के साथ आज राष्ट्र निर्माताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए देश के भविष्य के असली शिल्पकार शिक्षको का सम्मान किया।ओर वक्ताओं ने कहा कि “गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागू पाव बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए”यही हमारी गुरुजनों के प्रति शाश्वत विचारधारा है।गुरु ही हमारे जीवन को ज्ञान रूपी रोशनी से आलोकित करते है।। इस अवसर पर राष्ट्रपति पदक से सम्मानित जिले के शिक्षाविद व गुरुजन करण सिंह राठौड़ , गणपत सिंह जी देवड़ा एवं धीरेंद्र सिंह सिंदल, बलवीर मरडीया एवं समस्त उन शिक्षकों का सम्मान किया गया।। समाज सेवी जय विक्रम हरण ने कहा कि हमारे गुरुजनों ने ईमानदारी से अपने क्षेत्र में शिक्षा व शिक्षार्थियों के उन्नयन के लिए कार्य किया और कर रहे हैं एक शिक्षक जिन्होंने हमें पढ़ाया और काबिल बनाया जिनसे बचपन में हम सबसे ज्यादा डरा करते थे उनका सम्मान करने का अवसर मिलना हमारे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है शिक्षक ही हमें वह शक्ति देता है जिससे हम असंभव कार्य को संभव बना सकते हैं आज उन शिक्षकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर रोटरी क्लब सिरोही को मिला है।। कार्यक्रम में रोटरी क्लब के सदस्य संजय अग्रवाल, शिरीष हरण, राजीव चौरसिया, एवं मुकेश सोनी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तथा योग संस्थान शिविर से भीक सिंह भाटी, जय विक्रम हरण, अखिलेश मोदी, आचार्य प्रदीपदवे, डॉ गौरव ,श्री गोपाल व एवं अन्य सम्माननीय नागरिक भी उपस्थित रहे एवं सभी ने शिक्षकों का तहे दिल से सम्मान किया व बुजुर्ग युवाभीखसिंह जिनकी प्रेरणा से गांधी पार्क में समस्त कार्यक्रम आयोजित होते हैं उनके बहुमान के साथ उन शिक्षकों का सम्मान करने का अवसर मिला जिन्होंने हमें पढ़ाया और उस पढ़ाई के दौरान पढ़े हुए नौजवान भी आज शिक्षक बने बुजुर्ग एवं नौजवान दोनों शिक्षकों का सम्मान साथ में होना बहुत बड़ी उपलब्धि है शारीरिक शिक्षक राजेंद्र सिंह देवड़ा ने कहा कि हमारे शिक्षकों के साथ हमारा सम्मान होना ही हमारा सबसे बडा सम्मान है देश के समस्त उन शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं जिनकी वजह से देश का भविष्य आगे बढ़ रहा है विश्व में भारत ही सबसे प्रथम ऐसा देश है जहां पर सबसे ज्यादा परिवार चाहते हैं कि हमारे बच्चे शिक्षक बने क्योंकि गुरु के बिना समस्त ज्ञान अधूरा है।

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