पीड़ित ने रोहिड़ा थाने में दी शिकायत, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
सिरोही , राजस्थान ।
(रिपोर्ट तुषार पुरोहित),
फर्जी हस्ताक्षर कर खनन परियोजना के समर्थन में भेजा गया ज्ञापन
पीड़ित ने रोहिड़ा थाने में दी शिकायत, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
भाजपा से जिला परिषद सदस्य रीना ने भी दी थाने में रिपोर्ट
सिरोही, राजस्थान ।
मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब परियोजना के समर्थन में फर्जी हस्ताक्षर, नाम और मोबाइल नंबर के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। भारजा निवासी परबत सिंह देवड़ा ने रोहिड़ा थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। इधर, जिला परिषद सदस्य रीना भुवनेश पुरोहित ने भी स्वरूपगंज थाना क्षेत्र में फर्जी हस्ताक्षर व सुझाव पत्र मामले में रिपोर्ट दी है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
रोहिड़ा थाने के हेड कांस्टेबल देवा राम मीणा के अनुसार— “पीड़ित परबत सिंह देवड़ा की शिकायत प्राप्त हुई है। थानाधिकारी को अवगत करा आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।”
“मेरे फर्जी हस्ताक्षर कर समर्थन दिखाया गया”— पीड़ित
पीड़ित परबत सिंह ने शिकायत में बताया कि 19 सितंबर 2025 को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, क्षेत्रीय कार्यालय आबू रोड में एक फर्जी ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस दस्तावेज़ में उसके नाम, मोबाइल नंबर और नकली हस्ताक्षर का उपयोग कर उसे खनन परियोजना के समर्थन में सहमति देने वाला दर्शाया गया, जबकि— उसने ऐसा कोई ज्ञापन कभी प्रस्तुत नहीं किया, न ही किसी को अपने हस्ताक्षर अथवा पहचान उपयोग करने की अनुमति दी, और न ही उसे इस पूरे मामले की जानकारी थी। पीड़ित के अनुसार यह कृत्य न केवल जालसाजी (Forgery) है बल्कि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने की योजना भी है।
कई धाराओं में बनता है गंभीर आपराधिक मामला
पीड़ित ने शिकायत में उल्लेख किया कि यह कृत्य—कूटरचना (Forgery), धोखाधड़ी हेतु कूटरचना, फर्जी दस्तावेज का उपयोग, तथा प्रतिष्ठा हानि हेतु कूटरचित दस्तावेज के तहत दंडनीय अपराध है। उन्होंने पुलिस से कठोर कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन जमा कैसे हुआ?
अधिकारी भी सवालों के घेरे में
पीड़ित ने कई गंभीर सवाल उठाए— “जब मैं मौके पर था ही नहीं, तो मेरे हस्ताक्षर कैसे किए गए?” “फर्जी पत्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल तक कैसे पहुँचा?” “कार्यालय ने इस दस्तावेज़ को किस आधार पर स्वीकार किया?” पीड़ित ने न केवल जाली हस्ताक्षर करने वालों पर, बल्कि ज्ञापन प्रस्तुत कराने वालों और कार्यालय में इसे स्वीकार करने वाले कार्मिकों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
कंपनी की भूमिका की भी जांच हो—पीड़ित की मांग
पीड़ित ने कहा कि यदि यह जालसाजी मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से की गई है, तो कंपनी के जिम्मेदारों के खिलाफ भी FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए। निष्पक्ष जांच व FIR दर्ज करने की मांग
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए। फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान कर FIR दर्ज की जाए। दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि वह जांच में पूर्ण सहयोग देंगे और न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचे हैं।
सुलगते गंभीर सवाल
इस मामले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं— जब पीड़ित ने कोई दस्तावेज़ साइन ही नहीं किया, तो वह सरकारी कार्यालय में उसके हस्ताक्षर सहित कैसे जमा हो गया? इस पूरे कृत्य के पीछे किसकी भूमिका रही? क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर दोषियों तक पहुंचेगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी के नाम का फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज़ तैयार करना अत्यंत गंभीर अपराध है, और यदि ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई न हुई तो भविष्य में किसी की भी पहचान का दुरुपयोग किया जा सकता है।
