
सिरोही, राजस्थान ।
(रिपोर्ट सुनील सिंघानिया) ,
जावाल पंचायत क्षेत्र की नोकड़ा गली में नाली का गंदा पानी कई महीनों से जमा होने के कारण ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मोरलाई नाड़ी का गंदा व बदबूदार पानी पूरी गली में फैल गया है, जिसके कारण मार्ग दलदल में बदल चुका है। ग्रामीणों के अनुसार यहां से रोजाना बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इसी गंदे पानी से गुजरकर स्कूल, खेत, काम व मंदिर जाते हैं। तस्वीरों में स्पष्ट दिख रहा है कि लोग जूते-चप्पल हाथ में लेकर घुटनों तक भरे गंदे पानी में चलने को मजबूर हैं। सड़क के दोनों ओर कीचड़, गंदगी, उखड़ी मिट्टी और टूटी सतह लोगों को हर कदम पर घायल होने का खतरा देती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थिति की शिकायत पंचायत में कई बार की गई, लेकिन आज तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई। नाली की सफाई, पानी निकासी और सड़क सुधार की मूल मांग वर्षों से लंबित है। प्यारी देवी घांची, जावाल ने कहा कि वे कई सालों से इस समस्या से जूझ रही हैं। उनका कहना है—“हमने बार-बार पंचायत में कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सरपंच फूली देवी ने चुनाव के समय हमें हर तरह का साथ देने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। हमसे खुलकर कहा गया था कि आपका साथ देंगे, पर आज हालत यह है कि हमें खुद ही गंदे पानी में उतरना पड़ता है। यह सरपंच की पूरी लापरवाही है।”
ग्रामीण पवन कुंवर भाटी ने बताया कि करीब दो महीने पहले इसी गंदे पानी में फिसलकर उनका पैर फैक्चर हो गया था। उन्होंने कहा—“मैं गिर गई थी, पैर टूट गया। अभी भी दर्द है। पंचायत को उसी समय शिकायत दी थी, लेकिन किसी ने जाकर देखने तक की जरूरत नहीं समझी। हमारी तकलीफ सिर्फ कागजों में रह गई। अगर नाली और सड़क सही होती तो यह दुर्घटना नहीं होती।”
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यहां से जुड़े भाजपा उपाध्यक्ष छगन घांची का रोजाना इस मार्ग से आवागमन रहता है। ग्रामीणों ने बताया—“छगन घांची रोज गाड़ी में आते-जाते हैं, पर कभी नीचे उतरकर यह नहीं देखा कि यहां कितना पानी भरा है और हम किस हाल में चल रहे हैं। हमने उनसे कई बार कहा कि हमारी समस्या उठाएँ, लेकिन जवाब तक नहीं दिया। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, काम कुछ नहीं होता।” ग्रामीणों का कहना है कि नेतृत्व हो या पंचायत—दोनों की बेरुखी ने स्थिति को और बदतर कर दिया है।
लीला कुंवर भाटी ने कहा कि बच्चों को स्कूल जाने में भारी दिक्कत होती है। महिलाएँ साड़ी उठाकर कीचड़ में चलती हैं, बुजुर्गों को पैर जमाकर चलने में भी दिक्कत आती है। उन्होंने कहा—“पहले हमारी नाली ठीक करो। मंदिर जाने तक में परेशानी होती है। कई सालों से सड़क टूटी-पड़ी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।”
फोटो में साफ दिख रहा है कि ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह बाधित है। बच्चे कपड़े गंदे होने के डर से जूते हाथ में लेकर चलते हैं। महिलाएँ व बुजुर्ग कीचड़ में फँसकर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। सड़क का अस्तित्व मिट चुका है और पानी की मोटी परत रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत और स्थानीय नेतृत्व की लापरवाही अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। समस्या का हल तुरंत निकालकर नाली निर्माण, पानी निकासी, सड़क मरम्मत और नियमित सफाई की मांग की गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सफाई ठेकेदार वगाराम माली ने बताया कि गली में भरे गंदे पानी की समस्या उनकी जिम्मेदारी में नहीं आती। उन्होंने कहा कि यह पूरा कार्य पंचायत और सचिव स्तर का है।
वगाराम माली ने कहा—
“यह मेरी समस्या नहीं है। यह पूरी तरह पंचायत का काम है। नाली बनाना, नाला खोलना या नया नाला तैयार करवाना पंचायत की जिम्मेदारी है। मैंने पहले ही पंचायत और सचिव को इस स्थिति के बारे में अवगत करा दिया था। पानी तालाब की तरफ से भरकर आ रहा है, जब तक जेईएन और पंचायत इस पर निर्णय नहीं लेते, यह समस्या हल नहीं होगी। मैंने अपनी ओर से रिपोर्ट आगे भेज दी है।”

