V24 NEWS CHANNEL (किशनलाल) ,
माउन्ट आबू, सिरोही राजस्थान।
गुरु वही जिसके अंदर गुरु होने का अहंकार न हो,
ज्ञान सरोवर में सर्व धर्म सम्मेलन आरंभ,
माउंट आबू, 26 जुलाई।
भुवनेश्वर से आये आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि गुरु वही बन सकता है जिसके अंदर गुरु होने का अहंकार न हो। भारत विश्व गुरु तभी बनेगा जब हमारे अंदर का अहंकार खत्म हो। स्वयं की वास्तविकता को जानने की जिज्ञासा ही अहंकार को समाप्त करती है इसके लिए ब्रह्माकुमारी संस्था में स्वयं परमात्मा के द्वारा दिये जा रहे सत्य ज्ञान को आत्मसात करने की आवश्यकता है। वसुधैव कुटुंबकम की परिकल्पना केवल ब्रह्माकुमारी संगठन में दृष्टिगोचर होती है। यहां के ज्ञान की सत्यता का प्रकाश समूचे विश्व में फैल रहा है।यह बात उन्होंने शुक्रवार को ब्रह्माकुमारी संगठन के ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में धार्मिक सेवा प्रभाग के बैनर तले सनातन संस्क्रति का आधार अध्यात्म विषय पर तीन दिवसीय आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि की हैसितय से कही।

लुधियाना से संत बाबा दर्शन सिंह ने कहा कि अगर हम यह समझ जाये कि हम कौन हैं, जातियों, धर्मों, भाषाओं के पर्दे से बाहर निकलकर ही सत्य परमात्मा से मन के तार जुडते हैं। कटनी से आये आचार्य महाराज परमानंद ने कहा कि संस्कार और कर्म से संस्क्रति बनती है। भारत की सनातन संस्क्रति के संरक्षण को लेकर ब्रहमाकुमारी बहनों का अतुलनीय योगदान है। भारत के सब संतो के ब्रह्माकुमारी संगठन के साथ मिलकर कार्य करने से ही भारत विश्व गुरू बनेगा। यहां के सत्य ज्ञान को आत्मसात करने के लिए परमात्मा से जुडना जरूरी है।ऑल इंडिया बुद्धिस्ट मोंक सोसाइटी जनरल सेके्रटरी भदन्त करूणाकर महाथेरा ने कहा कि मन की पवित्रता, वाणी की शुद्धता के लिए प्रतिदिन ईश्वरीय ज्ञान का निरंतर आत्मसात करने के साथ नियमित रूप से राजयोग का अभ्यास किया जाना चाहिए। आत्मा का निरीक्षण व परीक्षण करने से ही स्वयं के भीतरी संसार को बदलने के संकल्प प्रबल होते हैंं।संगठन के अतिरिक्त महासचिव बीके ब्रजमोहन आनंद ने कहा कि सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान से ही विश्व बंधुत्व की भावना को बल मिलता है। भारत से ही विश्व एकता के बीज अंकुरित होंगे।पूना से आये मठाधिपति शिवयोगी नंदगिरी महाराज ने कहा कि अंतकरण में शांति के सरोवर का अनुभव करने के लिए मानसिक पवित्रता को बल दिये जाने की आवश्यकता है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम के चरित्रों का अनुसरण करना चाहिए।

प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी मनोरमा दीदी ने कहा कि मानवता के अंदर आध्यात्मिकता का अभाव होने से ही मानवीय मूल्यों का दोहन हो रहा है। भारत के अध्यात्म को विश्व के हर कोने तक पहुंचाने के लिए संगठन प्रयासरत है। सामुहिक रूपों से ही भारत विश्व गुरू बनेगा।सहारनपुर से आये महामंडलेश्वर कमल किशोर, अयोध्या से आये आचार्य जालेश्वरदास, फरूर्खाबाद से आये महंत दुर्वासा ऋषि आश्रम पांचालघाट के स्वामी ईश्वरदास, प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके रामनाथ आदि ने भी विचार व्यक्त किये। सोनीपत हांसी से वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका बीके लक्ष्मी बहन ने मचं का संचालन किया। इससे पूर्व अतिथियों की ओर से दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का विधिवत उदघाटन किया गया।

