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माउंट आबू/सिरोही , राजस्थान ।
(किशनलाल)

निष्पक्ष निर्णय देना सच्चे न्यायवेताओं का धर्म – पटनायक
ब्रह्माकुमारी संगठन ज्ञान सरोवर में न्यायवेताओं का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आरंभ
माउंट आबू, 07 जून2024 ,
उड़ीसा हाईकोर्ट न्यायाधीष आर.के. पटनायक ने कहा कि आध्यात्मिकता से परिपूर्ण निष्पक्ष रूप से निर्णय देना ही सच्चे न्यायवेताओं का धर्म है। संपूर्ण निष्ठा के साथ कार्य करने से निर्णय कभी भी अनुचित नहीं होता है। अध्यात्मिकता को जीवन में समावेश करना अनिवार्य हो गया है। बिना आध्यात्म के किसी भी बात पर निर्णय देना संपूर्ण सार्थकता को प्राप्त नहीं होता है। वे शुक्रवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में न्यायविद प्रभाग द्वारा तीन दिवसीय आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।उड़ीसा हाईकोर्ट न्यायाधीष शशिकांत मिश्रा ने कहा कि सद्धविचार मनुष्य की अविनाशी संपत्ति की तरह हैं। जो चित्त की एकाग्रता को बढ़ाने के साथ निर्णय व परखने की शक्ति को बढ़ाते हैं। न्यायवेताओं का मन व बुद्धि का बहुत महीन कार्य होता है। इस महीन कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राजयोग का अभ्यास जरूरी है जिससे आंतरिक शक्तियां विकसित होती हैं।

संगठन की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सुदेश दीदी ने कहा कि चित को निर्विकारी बनाए बिना जीवन में सुख, शान्ति अनुभव नहीं किया जा सकता है। आत्मिक शक्तियों से संचालित होने वाले शरीर के जरिए किए जाने वाले कर्मों को श्रेष्ठ बनाने से ही जीवन सुखदायी बनेगा।राजनीतिक प्रभाग अध्यक्ष बीके बृजमोहन आनंद ने कहा कि मन की शक्तियों को निखारने की चाबी है। सुकर्मों के बिना जीवन में शांति संभव नहीं है। विकर्म करने वाले भ्रमित व्यक्ति का मन विषय विकारों में भटकता रहता है।तेलंगाना हाईकोर्ट न्यायाधीष श्रीमती सुरेपल्ली नंदा ने कहा कि जीवन की व्यवस्थाएं हमारे मन की अवस्था पर ही निर्भर करती हैं। इसलिए जीवन उतार चढ़ाव के समय मानसिक अवस्था को श्रेष्ठ बनाए रखने के लिए पुण्य कर्म ही करने चाहिए। पुण्य कर्म की सच्ची पूंजी हैं।

प्रभाग की अध्यक्षा बीके पुश्पा दीदी ने कहा कि शांति और मानवता एक दूसरे के पूरक हैं। समाज से लुप्त हुई शान्ति को पुर्नस्थापित करने के लिए राजयोग का अभ्यास नितांत आवश्यक है।उड़ीसा हाईकोर्ट न्यायाधीष आदित्य कुमार मोहपात्रा ने कहा कि जब न्यायपालिका के प्रतिनिधि चरित्रवान होंगे तब ही संविधान के नियमों का पालना करना संभव होता है। सकारात्मक परिवर्तन के लिए ब्रह्माकुमारी संगठन द्वारा प्रशिक्षित राजयोग के मनोविज्ञान को गहराई से समझने से जीवन का महत्व जान सकेंगे। ने राजयोग का नियमित अभ्यास करने से जीवन को ऊर्जावान बनाए रखने पर बल दिया।राश्ट्रीय संयोजिका बीके लता अग्रवाल, मुख्यालय संयोजिका बीके श्रद्धा अनंत जोषी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
