आविम स्कूल मान्यता व सरूपगंज प्रकरण, विधाभारती के प्रांत सचिव महेंद्र दवे मीडिया से रूबरू,

विधा भारती शिक्षा के साथ संस्कार व छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित महान संस्था।

आविम स्कूल सरूपगंज में हर कार्य नियमानुसार, व्यक्तिगत हितो से संस्था को चन्द जन कर रहे बदनाम,

सिरोही(हरीश दवे),

आदर्श विद्या मन्दिर उ.प्रा.सरूपगंज जमीन व मान्यता  प्रकरण में पुलिस जांच व न्यायिक प्रकरण को लेकर विधा भारती के प्रांत सचिव महेंद्र दवे व सिरोही जिला विधा भारती के अध्यक्ष कैलाश जोशी व सचिव लाखाराम चौधरी की मौजूदगी में हुई। प्रांतीय सचिव विधा भारती महेंद्र दवे ने पत्रकारों से बात चीत करते हुए कहा कीभारत में विद्या भारती के प्रथम विद्यालय की 1952 में सर्वप्रथम शुरूआत हुई। शिशु मंदिर की विशेषता यह है शिक्षा के साथ संस्कार एवं छात्र के सर्वांगीण विकास के लिए विद्या भारती देश भर में विद्यालय चलाते है। वर्तमान में विद्या भारती के 12791 विद्यालय, 3449664 विद्यार्थी एवं  155500 श्रिक्षक कार्यरत है।जिसमें सिरोही जिले में 35 विद्यालय 14255 विद्यार्थी एवं 650 शिक्षक सेवारत है तथा सिरोही जिले में अभावग्रस्त समाज के बच्चो के लिए 20 संस्कार केन्द्र, 40 एकल विद्यालय निःशुल्क संचालित है जिसमें 60 शिक्षक कार्यरत है।।देशभर म चलने वाले विद्यालय केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर जारी नीति, नियमों एवं निदेर्शो का अकक्षरसः पालना करते हुए संचालित है।सरूपगज में भी विद्या भारती का विद्यालय आदर्श विद्या मंदिर उ.प्रा़. सरूपगंज जो नीति, नियमों एवं निदेर्शो का अकक्षरसः पालन करते हुए संचालित है  जिसकी भूमि 30.01.2004 को संस्था को उक्त जमीन राज्य सरकार द्वारा कीमतन आवटंन की गई। 05 अप्रैल 2004 को संस्था को उक्त जमीन का कब्जा पिण्डवाडा तहसीलदार द्वारा सपूर्द किया गया। व 17अप्रैल .2004 को संस्था के नाम पटट/रजिस्ट्री करवाई गई।विगत 05.11.2004 को  ग्राम पंचायत भावरी ने संस्था को भवन निर्माण की एनओसी जारी की गई।तथा मीठालाल खण्डेलवाल पक्ष ने संस्था जमीन आवटंन की राजस्व न्यायालय में जमीन के विरूद्ध शिकायत की जिसका फैसला राजस्व न्यायालय पाली ने 05.04.2006 को संस्था के पक्ष में सुनाया । राज्य संरकार द्वारा भी संस्था का आवटंन सही माना।उसके बाद  मीठालाल खण्डेलवाल पक्ष ने संस्था जमीन आवटंन की शिकायत राजस्व मण्डल राजस्थान अजमेर में की गई। जिसका 26.11.2013 को राजस्व मण्डल राजस्थान अजमेर द्वारा संस्था के पक्ष में फैसला दिया गया।उसके बाद पुनः खण्डेलवाल पक्ष ने संस्था की जमीन के विरूद्ध शिकायत राजस्व न्यायालय पाली में की । जिसका फैसला राजस्व न्यायालय पाली ने 28.09.2018 को पुनः संस्था के पक्ष में ही फैसला दिया गया व राज्य सरकार द्वारा भी संस्था का भू आवटंन सही माना। दवे ने बताया की उक्त जमीन पर 28.06.2019 को उ.प्रा. स्तर की मान्यता के लिए राज्य सरकार को आवेदन किया । उस समय इस जमीन के सन्दर्भ में कोई प्रकरण नही चल रहा था।व निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा बीकानेर राजस्थान के अन्तिम अनुमोदन के बाद आदर्श विद्या मंदिर उ.प्रा. विद्यालय सरूपगंज को नियमानुसार उ.प्रा. स्तर की मान्यता दिनांक – 15.10.2019 सत्र 2019-20 में दी गई थी। उस समय इस जमीन के सन्दर्भ में कोई प्रकरण नही चल रहा था। क्योकि राज्य सरकार व राजस्व न्यायालय द्वारा संस्था के पक्ष में ही फैसला दिया था।तथा 28.09.2018 से 07.10.2020 के मध्य किसी कोर्ट में फैसला विचाराधीन नही था।उस समय दिनांकः- 15.10.2019 में सत्र 2019-20 में उ.प्रा.स्तर की मान्यता दी गई।उसके बाद अचानक प्रशासन ने परिवादी की शिकायत पर पुनः संस्था का पक्ष सुने बिना एवं माननीय राजस्व न्यायालय के फैसले के विरूद्व कार्यवाही शुरू की गई।उसके बाद दिनांक 06.01.2020 को प्रशासन के द्वारा नोटिस निकाला। जिसका जवाब संस्था ने 13.01.2020 को दिया गया। उस जवाब पर कोई टिप्पणी किये बगैर व संस्था का पक्ष सुने बिना ही उन्होने संस्था के विरूद्ध कार्यवाही शुरू की गई। इस मामले पर संस्था ने माननीय राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में अपील की जिसमे माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर ने दिनांक 07.10.2020 को संस्था के पक्ष चार सप्ताह का स्थगन आदेश दिया।उसके बाद माननीय राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर द्वारा दिनांक 07.03.2021 को उसी अस्थाई स्टे को स्थाई स्टे संस्था के पक्ष में दिया गया।

माननीय राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के स्थाई स्टे के बाद भी प्रशासन ने में 22.04.2022 को उस जमीन को बिलानाम घोषित करके माननीय उच्च नयायालय के दिनांक 07.10.2020 व 17.03.2021 के आदेशों की घोर अवहेलना व ंअवमानना की है।वर्तमान मे एक विधवा कि आड मे यह सब षडयत्र पवित्र संस्था के विरूद्व किया जा रहा है जबकि जहां विधवा का निवास है वह संस्थान की जमीन है एवं सस्था ने उसको सहारा ही दिया है।

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