आबूरोड , सिरोही।

रिपोर्ट कनैयालाल मकवाना ,

भील समाज रोही भितरोट परगना का वार्षिक मेला हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरतानेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण लौटाना में हुआ आयोजित ।

मेले मे भील समाज के लोग अपने घर से ही मीठा पकवान बनाकर साथ लेकर आते हैं।मालपुआ का भोग लगाकर अपनी श्रृद्धा सुमन अर्पित करते हैं।मेले में पुरी रात समाज के लोग ,भाई बहन मित्रों के साथ हाट बाजार में घुमते नजर आए तथा खरीददारी की मेले में आए झूलो का भी खूब आनंद उठाते हैं।

मेले में ही कहीं बहनों की व कहीं भाईयों की सगाईया फिक्स हो जाती है।लड़के वाले लड़की को देखते है तथा लड़की वाले लड़के को देखते है।यह (देखने -दिखाने) अपने सगे संबंधियों के माध्यम से होता है।यदि परिवार वालों को उनका व्यवहार पसंद आता है तो वे मेले के बाद (लड़का -लड़की) के घर जाकर मांग की जाती है।पहले से यदि बात चल रही होती है तो भी मेले में सभी परिवार वाले देखते हैं तथा सगे संबंधियों से उनके व्यवहार की जानकारी लेते हैं।लड़का लड़की यदि बालिग है और सगाई हुई है तो मेले में साथ घुमते है जिसकी छुट माता-पिता से इनडायरेक्ट मिल जाती है। नये नये जमाई राजा खूब जमकर खरीददारी करवाते हैं मेले में…. साले को सालियों को भी खिलाने पीलाने में पीछे नहीं रहते। वहीं से मोहर लग जाती है की जमाई राजा तो दिलदार है।।

इस मेले के प्रति भील समाज में एक महीने पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती है। परिवार के लोगों के कपड़े खरीदना । गुजरात महाराष्ट्र में यदि कोई कमाने जाते हैं तो वे भी इस मेले पर घर आते हैं।खेती का काम भी मेले से पहले निपटाने की कोशिश करते हैं।मेले में पुरे परिवार के साथ अपनी पारम्परिक वेशभूषा व सज-धज कर पहुंचते हैं।मेले में आते समय गाड़ियों में मेले के गीतों को गाते हुए खुशी के साथ पहुंचे ।

मेले में देर रात्री तक भील समाज के कलाकारों द्वारा मेला गीतों पर पैरों में घुंघरू बांध कर नृत्य किया जाता है जो देखने का आकर्षण का केंद्र बना युवाओं द्वारा मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी रखी जाती है। कुछ वर्षों से शांति व्यवस्था हेतु पुलिस प्रशासन का भी सहयोग लिया जाता है। मेले में यदि कोई शराबी व्यक्ति पहुंचता है और मेले में उतपाद मचाता है तो समाज द्वारा 11000/- ग्यारह हजार रुपए का दंड लिया जाएगा। कोई धारदार हथियार के साथ मिलता है तो पुलिस के हवाले किया जाएगा। मेले में इस बार रात्रि 1 बजे के बाद बहन बेटियों को घुमने की अनुमति नहीं रहेगी। प्रातः 5 बजे से पुनः घुमने की अनुमति रहेगी।यह मेले की व्यवस्था को बनाए रखने हेतु नियम बनाया गया है।

मेले में पाली सिरोही उदयपुर सहित गुजरात राज्य से भारी संख्या में समाज के लोग पहुचते है।यह मेला पश्चिम राजस्थान का सबसे बड़ा भील समाज का मेला भरता है।जिसकी पहचान भूरिया बाबा का मेले के नाम से होती आज पहचान बनी हुई हैं

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