पिण्डवाड़ा/ सिरोही, राजस्थान ।
( रिपोर्ट तुषार पुरोहित) ;

सिरोही
पिण्डवाड़ा में प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ आंदोलन को एक महीना पूरा
— क्षेत्र के ग्रामीणों का सरकार के प्रति रोष चरम पर, भारजा गांव में सद्बुद्धि हवन,
वाटेरा में आज फिर नेताओं के खिलाफ हुई नारेबाजी, आगामी रणनीतिक पर मंथन
सिरोही।
पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन आज एक महीने का पड़ाव पार कर चुका है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। क्षेत्र के चारों ग्राम पंचायतें — भारजा, वाटेरा, भीमाना और रोहिड़ा लगातार अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। ग्रामीणों ने कई बार ज्ञापन सौंपे, जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, परंतु परिणाम सिर्फ आश्वासनों तक ही सीमित रहा है।
भारजा गांव में किया गया सद्बुद्धि हवन
सरकार की निष्क्रियता से आक्रोशित भारजा ग्रामवासियों ने आज गांव के हनुमान जी मंदिर परिसर में “सद्बुद्धि हवन” का आयोजन किया। ग्रामीणों ने भगवान हनुमान से प्रार्थना की कि राज्य सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करें ताकि क्षेत्र को विनाश की ओर ले जाने वाली इस प्रस्तावित खनन परियोजना को निरस्त किया जा सके। हवन में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने कहा कि यह आंदोलन केवल खनन के खिलाफ नहीं बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष है।
वाटेरा में हुई रणनीतिक बैठक, नेताओं के खिलाफ नारेबाजी
वहीं वाटेरा गांव में भी आज ग्रामीणों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एक महीना बीत जाने के बाद भी सरकारी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और अविश्वास का माहौल है। इस दौरान ग्रामीणों ने आज फिर सत्तारूढ़ दल के नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द परियोजना निरस्त नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
“हम अपनी जमीन बचाएंगे” — ग्रामीणों का संकल्प
ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन अब किसी दल या संगठन का नहीं, बल्कि जनता का आंदोलन बन चुका है। गांवों में अब हर वर्ग के लोग एकजुट होकर परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि “हम अपनी जमीन, पानी और पर्यावरण को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए हमें कितनी भी लंबी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।”
उल्लेखनीय है कि पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित यह खनन परियोजना बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय प्रभाव डाल सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र की नदियां, पेयजल स्रोत और कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी। पिछले एक महीने से लगातार धरने, रैलियां, जनसभा और हवन यज्ञ के माध्यम से विरोध जताया जा रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णायक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
