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संकल्प की शक्ति से होता है चमत्कार-डॉक्टर मोहित

माउंट आबू ।

दिल्ली से आये ख्यातनाम मोटिवेशनल स्पीकर, कार्डियोलॉजिस्ट डां. मोहित गुप्ता ने कहा कि आधुनिक युग में ज्यादा एक्टिव रहने वाले लोग, अधिक नकारात्मकता के कारण ही बीमार होते हैं। इन बीमारियों का मुख्य कारण तनाव, ईर्ष्या, व्यक्ति के व्यवहार में नकारात्मकता व खान-पान में अशुद्धि आदि शामिल है। दैनिक दिनचर्या में सहज राजयोग का अभ्यास व आध्यात्मिकता को अपनाने से जीवन शैली में आये बदलाव से ठीक किया जाना संभव है। यह बात उन्होंने ब्रह्मा कुमारीज के यातायात एवं परिवहन प्रभाग द्वारा ज्ञान सरोवर परिसर में आयोजित सेमिनार के खुले सत्र में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में कही। उन्होंने कहा कि दुनिया में बड़ी-बड़ी रिसर्च स्टडी हुई है जिसमें यह पाया गया है कि व्यक्ति असाध्य रोगों पर भी अपने खान-पान की शुद्धता, विचारों की शुद्धि के आधार पर दृढ़ इच्छा शक्ति से सुरक्षित व स्वस्थ हो सकता है। जिस का प्रत्यक्ष उदाहरण के रूप में उन्होंने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि पढ़ाई में टॉपर बनना व ब्रेन कैंसर का इलाज जो कोई दवाई नहीं कर पाई उसको भी मेडिटेशन की शक्तिशाली लेजर किरणों से ठीक करने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है।वरिष्ठ राजयोगी एवं ब्रह्माकुमारी की राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाव के अध्यक्ष बृजमोहन आनंद ने कहा कि हमें अपने जीवन में नॉर्मल व नेचुरल को ध्यान में रखना चाहिए। हमारा व्यवहार, बोलचाल बहुत स्वाभाविक हो। सामान्य रूप से बात करना, सामान्य गति से वाहन चलाना चाहिए। यहां तक कि जितना ज्यादा तेज गति से सोचते हैं उतनी ही ज्यादा दुर्घटना होने की संभावना होती है। जितना प्राकृतिक गुणवत्ता वाला आहार लेते हैं या जो आत्मा के निजी गुण हैं उसके अनुरूप कार्य करते हैं तो सफल होते हैं। अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाने से ही मनुष्य दुखी होता हैं इसीलिए जीवन में जो प्राकृतिक रूप से आत्मा के गुण है उन्हें आत्मसात करके जीवन में आगे बढऩा चाहिए।मुंबई के जाने माने मनोचिकित्सक डा. हरीश शेट्टी ने बताया कि जब सब कुछ प्राप्त होते हुए भी व्यक्ति तनाव में होता है तो वह दवाइयां खाता है लेकिन जिनकी बीमारी दवाई से भी ठीक ना होती हो वह योग का प्रयोग करें तो अवश्य ही इसमें लाभ प्राप्त होता है। इस अवसर पर ईवी स्वामीनाथन ने बताया कि जैसे किसी सड़क पर चलने वाले वाहन के ईंधन में थोड़ी सी भी मिलावट होने पर वह गाड़ी रुक जाएगी, लेकिन अगर एरोप्लेन के फ्यूल में मिलावट हो तो दुर्घटना होने पर सभी की मृत्यु होने की स्थिति बन जाती है। इसीलिए एरोप्लेन में बहुत रिफाइंड ईंधन प्रयोग करते हैं। इसी तरह व्यक्ति के मन में यदि नकारात्मता, खान-पान में अशुद्धता, व्यवहार कटुता है उसको भी समाप्त करने की आवश्यकता है। तभी मनुष्य सुखी, प्रसन्न रह कर जीवन की यात्रा का आनंद ले सकता हैं।

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