पशु जैव विविधता संरक्षण एवं ऊँटो के संरक्षण व पशु जैव विविधता सरंक्षण केन्द्र का पीएफए में जागरूता शिविर।
सिरोही, राजस्थान/ (हरीश दवे)
राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर की ओर से संचालित पशु जैव विविधता संरक्षण केंद्र बीकानेर द्वारा प्रभारी अधिकारी डॉ मोहन लाल चौधरी के निर्देशन में डॉ. नरसी राम गुर्जर द्वारा *पशु जैव विविधता संरक्षण एवं ऊँटो के संरक्षण विषय पर शिविर का आयोजन किया गया* इस शिविर में डॉ नरसी राम गुर्जर ने पीपल फ़ॉर एनिमल एन जी ओ में पशु पालकों को पशु जैव विविधता का महत्व, इसकी उपयोगिता, और इसके बचाव बारे में विस्तार से बताया।और और ऊँट के सरंक्षण और बचाव को लेकर डॉ नरसी राम गुर्जर ने बताया कि ऊँट रेगिस्तान की पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनूठा महत्वपूर्ण घटक है अपनी अनूठी जैव भौतिकीय विशेषताओं के कारण यह शुष्क क्षेत्र की विषमताओं में जीवन यापन की अनुकूलता का प्रतीक बन गया है ये रेगिस्तान के जहाज के नाम से प्रसिद्ध है ऊंट एक राज्य पशु है भारत में सर्वाधिक ऊँट राजस्थान में पाए जाते हैं ऊँट का दूध विभिन्न बीमारियों में काम आता है जैसे टी बी, मधुमेह में लाभकारी सिद्ध होता है पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान रायका जाति के लोगों का राजस्थान की जैव विविधता में एक अनूठा स्थान है यह परंपरागत रूप से ऊंट प्रजनक रहे हैं ।पर्यावरण संरक्षण ज्ञान इनको विरासत में मिला है।

ऊँट रेगिस्तान के लिए, फ़ौज के लिए, बहुत उपयोगी हैं सरकार को भी इनके संरक्षण के लिए विशेष नीति बना के ऊँटो को बचाना चाहिए। रेगिस्तान के जहाज ऊँटो का संरक्षण पर राजुवास के जैव विविधता संरक्षण केंद्र द्वारा लिखी हुई बुकलेट भी वितरित की गई। ऊँटो के बचाव के लिए पशुपालकों और आमजन को आह्वान किया गया। पालकों के विभिन्न सवालों के जवाब दिए गए । इस शिविर में पशु धन सहायक हवा सिंह गुर्जर, पी एफ ए के मनोज जैन, चंद्रभान मोटवानी महनोर सिंह युवराज सिंह ,नेति राम देवासी ,सवाराम मुकेश पुरोहित लाला राम माली आदि उपस्थित रहे इस प्रशिक्षण शिविर में 18 पशुपालकों ने भाग लिया.।
