सिरोही, राजस्थान ।
रिपोर्ट, हरीश दवे
पंचायत समिति सिरोही के बाहर गो सरंक्षण की मांग पर बैठे अनशन कारी में दो का स्वास्थ्य बिगड़ा,
श्री गजानन्द सेवा समिति के 7 स्वयंसेवक 2 दिन से भूख हड़ताल पर ।
एसडीएम,तहसीलदार व सीआई ने की समझाईश,अनशनकारी मांग नही माने जाने तक धरने पे अडिग ।

आये दिन उथमण टोल प्लाजा में सड़क किनारे गोवंश की मौत व घायल होने से रोकने व घायल होने पर एम्बुलेंस सुविधा की मांग पर श्री गजानन्द सेवा समिति के अध्यक्षपशु एंबुलेंस की मांग को लेकर भूख हड़ताल जारी रही।

अध्यक्ष मंगल मीणा, उपाध्यक्ष गजेंद्र सिंह सिसोदिया 7 गौ भक्त भूख हड़ताल बैठे। व तहसीलदार के बाद रात्रि में एसडीएम रमेश चन्द्र बहेडिया व सीआई राजेन्द्र सिंह राजपुरोहित भी वहाँ पहुचे व अनशनकारियों से वार्ता कर धरना समाप्त करने की बात कही ओर समझाइश की व टोल के नियमो का हवाला दिया।
गोभक्तो ने एसडीएम से कहा कि फोर लाइन हाईवे हादसों में घायल होने वाले पशुओं के लिए पशु एंबुलेंस सहित डिवाइडर पर लोहे की जाली की व्यवस्था नहीं होने के कारण पशु काल का ग्रास बन रहे हैं।

गौ भक्त पशु एंबुलेंस की मांग टोल कंपनी व राज्य सरकार से उपलब्ध करवाना चाहते है, एसडीएम ने आश्वस्त किया है कि टोल कंपनी व हाइवे अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ भी वार्ता की जाएगी ।
लेकिन आंदोलनकारियों ने अपनी मांगे पूरी नही होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय रखा।
रात्रि में समाचार लिखे जाने तक हिंदुवेव के संयोजक हरीश दवे,व महंत रामानन्द जी ने भी भूख हड़ताल पे बैठे श्री गजानन्द सेवा समिति के गोभक्तो से भेंट की ।
जिसमे मंगल कुमार मीणा,पृथ्वी राज सिंह, वीरेन्द्र सिंह सिदरठ,रितु किन्नर,,अशोक हरिजन,छगन रावल,नारायण देवासी भूख हड़ताल पे दूसरे दिन भी बैठे है।जिनके समर्थन में घुप्प अंधेरे में धरना स्थल पर समर्थन में गोभक्तकरण सिंह, मोहन बोराणा, धन सिंह, रमेश प्रजापत, गणेश मीणा, जितेंद्र सिंह परमार, विक्रम मीणा, हितेश कुमार, नारायण घांची, हिमांशु गहलोत, वाघाराम कुम्हार, मंछा राम, मुकेश कुमार, किशोर कुमार, प्रवीण माली मुकेश कुमार, सवा राम, ह्रितिक मीणा, छगन लाल, जितेंद्र कुमार, दीपक कुमार,समर्थन में जुटे हुए है व भूख के कारण छगन रावल ,अशोक कुमार हरिजन के स्वास्थ्य कमजोर होता जा रहा है।
जिला प्रशासन को बेजुबान जानवरों के घायल होने व एम्बुलेंस की जायज मांग को जिला प्रशाषन के साथ गोवंस हित मे टोल व हाइवे अथॉरिटी व जन प्रतिनिधियों के अलावा पशु क्रूरता निवारण में लगी संस्थाओ व जीवदया प्रेमियो को भी समाधान में आगे आना चाहिए।
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