
“कृष्ण की आत्मकथा’ के रचयिता पर केंद्रित पुस्तक ‘अग्निरथ का सारथी’ का काशी के सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में किया गया विमोचन
परकाया प्रवेश जानते थे मनु शर्माःपूज्य सरकार
जब दुनिया साथ छोड़ दे तब सिर्फ ज्ञान साथ देता है : पूज्य सरकार
पद्मश्री पं. मनु शर्मा की 98वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम ‘हमारे मनु’ में पूज्य सरकार ने कहा
जब दुनिया साथ छोड़ दे, जब आपके अस्त्र-शस्त्र आपका साथ छोड़ दें। आपका कद-पद आपका साथ छोड़ दे तब कोई अगर साथ देता है तो केवल ज्ञान देता है। वह ज्ञान या तो गुरु से मिलता है या ग्रंथ से मिलता है। महाराज श्री ने कहा कि जीभ बड़ी खतरनाक है। अगर आप जीभ से सम्मान पाना चाहते हैं तो दो ही रास्ते हैं। या तो गुरु का बल हो या ग्रंथ का बल हो। ग्रंथ के बल का जीता जागता उदाहरण है हमारा काशी। ग्रंथ के बल पर भारत के सबसे ज्यादा रत्न या सम्मान अगर मिले होंगे तो किसी शहर को, तो वह काशी को मिले होंगे।
महाराज श्री ने कहा कि पद्म श्री पं. मनु शर्मा का तन काशी में पर मन ब्रज में रहा। वह केवल लेखक नहीं, पाठक नहीं, जीवक थे। वह जीते थे रचनाओं में, कृतियों में, संस्कृतियों में, काशी में, बनारस में और ब्रज में। उनकी जीवनशैली, शब्द, जीवनचर्या, चेतना, जीने का ढंग रह जाता था, रह जाता रहा, रहता रहेगा।
महाराज श्री ने कहा कि जान लेना तो ज्ञान है पर प्रकट कर देना विज्ञान है। हनुमान जी ज्ञान और विज्ञान के अनुपम उदाहरण हैं। हनुमान जी जानते भी हैं और रामजी को प्रकट भी करते हैं। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य जी के पास एक विद्या थी जिसका नाम परकाया प्रवेश था। परकाया प्रवेश का मतलब है जीते जी आपके अंदर प्रवेश करके आपकी स्मृतियों को खंगाल करके आपके बारे में बताना। परकाया प्रवेश का मतलब है अवचेतन मन को पढ़ना है। आप अपने जीवन में व्यथा को मिटाना चाहते हैं, कथा को पकड़ लीजिए…इस पुनीत अवसर पर पद्मभूषण डॉक्टर देवी प्रसाद जी,पद्मश्री पंडित गणेश्वर शास्त्री,पद्मश्री राजेश्वर आचार्य,पद्मश्री शिवनाथ मिश्र,पद्मश्री चंद्रशेखर पद्मश्री रजनीकांत असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ..संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति काशी विद्यापीठ के कुलपति कैबिनेट मिनिस्टर अनुप्रिया पटेल उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्रीगण एवं प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल संग पत्रकारिता जगत के पुरोधा हेमंत शर्मा जी की रही…
