सिरोही, राजस्थान ।
देलदर से चौथमल सूर्याल
सात समंदर पार से आए मातृ भूमि जैन समाज।
सिरोही : जावाल के नजदीकी देलदर गाम में सभ्य समाज जैन लोग कई पीढ़ियों से भारत के कौन कौन को अपनी वर्षों से कर्मभूमि बना कर स्थाई हो चुके है और व्यापार को नित नई बुलंदी को प्राप्त कर रहे है। लेकिन ग्रामीण कल्चर याद दिन रात सताती रही। इससे प्रेरित हो कर समाज के बड़े बुजुर्गो ने सामूहिक निर्णय लिया कि शहर से गांवों की ओर उनकी चाहत खींच ले आई । गांव में आते ही घर से बाहर रहना पसंद किया । उन्होंने ने स्कूल ग्राउंड में रहकर वहां तरह तरह के खेल पुरुष और महिलाओं के लिए अलग अलग खेलों का आयोजन किए गए । आज पहले दिन गांव की ही दस टीमों ने भाग लिया और प्रवासियों को मनोरंजित किया गया । प्रथम , द्वितीय और तीसरे स्थान प्राप्त करने वाली टीम को संघवी रिखब चंद पूनमचंद के परिवार वालों की तरफ़ से स्मृति चिन्ह दिया जायेगा । इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए न्यूयार्क से बेटी स्नेहलता आई हैं।यह कार्यक्रम लगातार तीन दिन तक चलेगा और उनके लिए चाय पानी व खाने की व्यवस्था मौके पर ही की गई ये सब नई पीढ़ी को ग्रामीण कल्चर सिखाने के लिए व मिलनसार बढ़ाने की ओर कदम हैं।

