माउंट आबू (सिरोही)

रिपोर्ट किशन लाल,

आदिवासी भील समाज के युवाओं ने मांगे अपने हक ।

नगरपालिका अध्यक्ष को ज्ञापन सौंप कर करवाया समस्याओं से अवगत ।

नगरपालिका के बाहर प्रदर्शन कर जताया विरोध ।

मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं आबू का आदिवासी ।

देश की आजादी को भले ही 75 वर्ष पूरे हो चुके हो, भले ही पुरा देश आज आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा हो… पर देश के आदिवासी आज 75 वर्ष बाद भी मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाया हैं… आज भी देश का अधिकांश आदिवासी अभावों में जीने को मज़बूर हैं… राजस्थान की बात करें तो प्रदेश की सबसे ऊँची नगरपालिका माउंट आबू के परिक्षेत्र में रहने वाला आदिवासी समाज आज भी बिना बिजली कनेक्शन और बिना नल कनेक्शन के अपना जीवन यापन करने को मज़बूर हैं… आबू के सीतावन, माली कॉलोनी, अर्बुदादेवी के आसपास, भील बस्ती देलवाड़ा, ढूंढाई, हेतम जी तथा कोर्ट के आसपास रहने आदिवासियों को आजादी के 75 वर्षों बाद भी उनके रहवासी मकानों के पट्टे नहीं मिल सके हैं… इन आदिवासियों को घर के पट्टे के अभाव में ना बिजली कनेक्शन मिल पा रहा हैं और ना ही पानी का कनेक्शन ।

सिर्फ इतना ही नहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वपूर्ण योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर शौचालय का फायदा भी इन आदिवासियों को पट्टे के अभाव में नहीं मिल पाया और इसके कारण यहां रहने वाले आदिवासी परिवारों की महिलाओं को आज भी खुले में शौच के लिए मज़बूर होना पड़ रहा हैं… इन सभी समस्याओं को लेकर आज आबू के आदिवासी भील समाज के युवाओ ने नगरपालिका के सामने विरोध प्रदर्शन कर पालिका अध्यक्ष को ज्ञापन सौंप कर अपने हक की मांग की… आपको बता दें माउंट आबू नगरपालिका में जीतू राणा वर्तमान में अध्यक्ष हैं, जो खुद भी आदिवासी समाज से आते हैं, पर आदिवासी समाज को उनके हक दिलवाने में अभी तक वो खुद भी कामयाब नहीं हो सके हैं ।

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